आंध्र प्रदेश: विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में लगी आग पर काबू पाए जाने के प्रयास जारी

विशाखापत्तनम,आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में गुरुवार को आग लगने की खबर सामने आई है। बताया गया है कि 1.2-मेगावाट इलेक्ट्रिक मोटर में टरबाइन तेल के रिसाव के कारण प्लांट में आग लग गई है। फिलहाल आग पर नियंत्रण पाने का काम चल रहा है। समाचार एजेंसी एएनआइ ने आग की कई तस्वीरें साझा की है। वहीं, घटना के कारण अब तक किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।


इससे पहले बुधवार को गुजरात के अहमदाबाद में एक कपड़े के गोदाम में आग लग गई थी। आग के बाद बिल्डिंग में हुए धमाके की वजह से छत गिर गई। हादसे में 12 लोगों की मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक, कुछ लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका लगाई गई थी। आग पर काबू के लिए दमकल की गाड़ियां मौके पर लगाई गईं थी। आग नानूकाका एस्टेट स्थित कपड़े के गोदाम में लगी थी। मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने मृतकों के परिजनों को 4 लाख रूपये मुआवजा देने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि पूरे मामले की जांच दो सीनियर अधिकारी करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर दुख जताया था। उन्होंने ट्वीट किया था कि अहमदाबाद के एक गोदाम में आग लगने से जानमाल के नुकसान से दुखी हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना। घायलों के लिए प्रार्थना।


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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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