प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर जमुना प्रसाद सरोज ने शोक संवेदना व्यक्त की

प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर जमुना प्रसाद सरोज ने शोक संवेदना व्यक्त की


मेरठ। अपना दल (एस) के प्रदेश अध्यक्ष लोकप्रिय विधायक सोरांव प्रयागराज डॉक्टर जमुना प्रसाद सरोज प्रयागराज से संगम रेलगाड़ी द्वारा रविवार को मेरठ पहुंचे तथा अपना दल (एस) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विधि मंच स्व. इंद्रपाल मलिक जी के दिवंगत आत्मा की शांति हेतु उनके निवास शास्त्रीनगर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके दो मिनट का मौन धारण कर शोक संवेदना व्यक्त की।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ सरोज ने पार्टी की ओर से श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इन्द्रपाल मलिक पार्टी के प्रति समर्पित थे उनके निधन से पार्टी को अपूर्ण क्षति हुई है उनके साथ जिलाध्यक्ष मेरठ सुधीर पंवार,प्रदेश सचिव महिला मंच अलका पटेल, जिलाध्यक्ष मुरादाबाद विजय शर्मा, जिलाध्यक्ष रामपुर घनवीर सिंह संधू , जिलाध्यक्ष बिजनौर जकी उल नासिर,जिलाध्यक्ष अमरोहा हरपाल प्रजापति, मुनीश पटेल, मुरारीलाल,दीपा लोधी, इमरान राणा, दीपक अग्रवाल,शिवकुमार खटीक, वीरेंद्र चौधरी, सुनील दत्त शर्मा,सुनील गुप्ता,कमल रोहटा,गुलवीर जाटव, करेश,गौरव पटेल, मनीषा सैनी, आरती, ज्योति, आजम हुसैन, बलीचन्द पाल सहित अन्य कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी गण मौजूद रहे।


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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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