कृषि कानून के विरोध में किसानों का धरना प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा

 कृषि कानून के विरोध में किसानों का धरना प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा


----- दिल्ली में किसानों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन का समर्थन कर रहे स्थानीय किसान

बिंदकी फतेहपुर

कृषि कानून के विरोध में दिल्ली में किसानों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन के समर्थन पर स्थानीय किसानों द्वारा चालू किया गया अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा इस मौके पर किसान नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक दिल्ली के किसान आंदोलन कर रहे वह भी लगातार उनके समर्थन में आंदोलन करते रहेंगे और हर हाल में कृषि कानून को वापस कराने का काम करेंगे

      जानकारी के अनुसार मंगलवार को तीसरे दिन भी जिला पंचायत सदस्य बबलू कालिया के नेतृत्व में क्षेत्रीय किसान कृष कानून के विरोध में धरना प्रदर्शन में बैठे रहे बताते चलें कि स्थानीय किसान दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं इस मौके पर धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिला पंचायत सदस्य बबलू कालिया ने कहा कि कृषि कानून के विरोध में हमारे किसान भाई लगातार दिल्ली में धरना प्रदर्शन कर रहे आंदोलन कर रहे निश्चित रूप से इसी के चलते हम स्थानीय किसानों ने मिलकर या अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया है और जब तक दिल्ली में किसान आंदोलन में डटे रहेंगे वह लोग भी अनिश्चितकालीन धरने में यहां बैठे रहेंगे उन्होंने कहा कि कृषि कानून पूरी तरह से किसान विरोधी है केंद्र की भाजपा सरकार को यह कानून हर हाल में वापस लेना होगा इस मौके पर विवेक मिश्रा मनीष पटेल सैलाब सुखीराम राम दुलारे पटेल संदीप कुमार सुशील कालिया अर्पित पटेल रमेश रामसखी सहित तमाम लोग मौजूद रहे

Popular posts
अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
चित्र
तू मेरी गीता पढ़ले मैं पढ़ लू तेरी कुरान, आपस मे भाई चारा निभा के बनायेगे नया हिंदुस्तान
चित्र
पाल सामुदायिक उत्थान समिति की ब्लाक इस्तरीय संगठनात्मक बैठक हुई सम्पन्न
चित्र
कानपुर में ठेले पर पान, चाट और समोसे बेचने वाले 256 लोग निकले करोड़पति
चित्र
योगी सरकार लोगों को देने जा रही फ्री वाईफाई सुविधा
चित्र