वनगमन लीला देख नम हो गई दर्शकों की आंखें

 वनगमन लीला देख नम हो गई दर्शकों की आंखें



बिंदकी फतेहपुर

 देवमई विकास खंड के गांव सराय महमूदपुर में रामलीला के दूसरे दिन  किरदारों द्वारा  राम वन गमन लीला का मंचन किया गया। रामलीला में राम,लक्ष्मण ने वन जाने के लिए पिता दशरथ से आज्ञा मांगी। इस दौरान दशरथ का विलाप देखकर दर्शकों की आंखें छलक आई। प्रदेश के प्रख्यात कलाकारों द्वारा रामलीला में ताड़का वध, अहिल्या उद्धार के साथ फुलवारी लीला का मंचन किया गया। लीला में दिखाया गया कि भगवान राम अपने छोटे भ्राता  लक्ष्मण के साथ मुनि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा के लिए वन को जाते हैं। दोनो भाइयों के वन के प्रस्थान के दौरान राजा दशरथ मुनि विश्वामित्र विलाप करते हुऐ कहते है मै अपनी आंखों के तारे आप को सौप रहा हूं राजा दशरथ के करुण क्रंदन विलाप को सुनकर वहां मौजूद दर्शकों की आंखें डबडबा आई मर्यादा पुरुषोत्तम राम अनुज लक्ष्मण व विश्वामित्र के साथ वन जाकर ताड़का सहित सुबाहु मारीचि आदि राक्षसों का वध राम के हाथों होता है। इसके बाद मुनि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा दोनों भाई करते हैं ।लीला में अहिल्या उद्धार का सुविख्यात कलाकारों द्वारा उत्कृष्ट मंचन किया गया लीला में दिखाया गया कि गौतम ऋषि के श्राफ से उनकी पत्नी अहिल्या पत्थर की सिला बन गयी थी जब मुनि विश्वामित्र के साथ दोनों भाई जा रहे थे तभी उस पत्थर की सिला के बारे मे पूंछा तो मुनि विश्वामित्र ने बताया कि गौतम ऋषि के श्राफ से पत्थर बन गयी थी। और सतयुग मे आपके छूने का इंतजार कर रही हैं, तभी मर्यादा पुरुषोत्तम राम उस पत्थर को अपने चरणों से स्पर्श करते हैं उससे अहिल्या प्रकट होती हैं, और भगवान राम को प्रणाम कर पुन: गौतम ऋषि के पास चली जाती हैं।उधर राजा जनक मिथला मे सीता का  स्वयंवर रचते हैं राजा जनक के बुलावे पर मुनि विश्वामित्र राम लक्ष्मण के साथ स्वयंबर मे शामिल होने के लिये जनकपुरी के लिये प्रस्थान करते हैं।

इस मौके पर संयोजक वीरेंद्र उर्फ राजू मिश्रा, आलोक उर्फ कल्लू पांडेय, आशुतोष पांडेय, हर्षित , रोहित पांडेय, महेश पांडे, संदीप पांडेय आदि लोग मौजूद रहे।