संदिग्ध परिस्थितियों में किसान की मौत किसी जहरीले कीड़े के काटने की आशंका

 संदिग्ध परिस्थितियों में किसान की मौत किसी जहरीले कीड़े के काटने की आशंका 



बाँदा संवाददाता। जिले के बबेरू तहसील अंतर्गत एक 50 वर्षीय व्यक्ति की खेत में संदिग्ध अवस्था में मौत वहीं जब मृतक दोपहर तक घर नहीं लौटा तभी उनके घर के परिजनों ने किसान को ढूंढना प्रारंभ किए तो परिजनों ने खेत पर जाकर देखा तो संदिग्ध अवस्था पर किसान मृत पड़ा हुआ था जिसकी जानकारी पारिवारिक जनों को वह गांव के लोगों को दी गई और परिवार के द्वारा आनन फानन बबेरू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया मौत की खबर सुनकर परिवार में कोहराम मच गया आपको बता दें पूरा मामला बबेरू कस्बे के आजाद नगर मोहल्ले का है जहां के रहने वाले रामराज चतुर्वेदी पुत्र शिवमंगल चतुर्वेदी उम्र 50 वर्ष उनके खेतों में मसूर उखाडी जा रही थी तो खेत देखने के लिए गया हुआ था वहीं जब घर चार से 5 घंटे तक नहीं पहुंचा तो उसका पुत्र अनुभव चतुर्वेदी तलाश करते हुए खेत पर पहुंचा जहां पर संदिग्ध अवस्था पर किसान में पड़ा हुआ था पुत्र ने आनन-फानन परिवार व पड़ोसियों को सूचना दी जिनके द्वारा मृतक को जिला बबेरू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया जहां पर डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया वहीं सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए।

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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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