सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता का खागा प्रवास

 सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता का खागा प्रवास



प्रकृति की ओर लौटने का दिया संदेश


अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह स्मारक में बैठक को किया संबोधित


फतेहपुर। राष्ट्र जागरण अभियान के उत्तर प्रदेश प्रवास दौरान अभियान की संस्थापक व संयोजक सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता सुबूही खान अपनी टीम के साथ नगर पंचायत पहुंची। यहां पर उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के स्वयंसेवकों तथा गणमान्य नागरिकों ने उन्हें पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया।

शनिवार सुबह गढ़ी मोहल्ला में अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह स्मारक परिसर में ‘राष्ट्र धर्म’ विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमे राष्ट्र जागरण अभियान की संस्थापक व संयोजक सुबूही ख़ान ने राष्ट्र और उसके प्रति हमारे कर्तव्य विषय पर युवाओं व नगर के प्रबुद्ध लोगों से संवाद किया। धर्म, पंथ व संस्कृति के अंतर को जानने और समझने के लिए प्रेरित किया। देश के सामने खड़ी चुनौतियों से अवगत कराते हुए उन्होंने कहा कि संगठित समाज द्वारा ही अखंड भारत सम्भव है। सुबूही खान ने अपने बारे में बताया कि वह अधिवक्ता के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता हैं। कबीर फाउंडेशन नामक संस्था की वह संस्थापक हैं। उन्होंने भारत के आठ से दस राज्यों में जाकर राजनैतिक, सामाजिक व वैधानिक सभी पहलुओं पर जागरण किया है। सुबूही खान व उनकी टीम राष्ट्र जागरण अभियान के अंतर्गत भारत प्रवास पर है। अभियान के बारे में उन्होंने कहा कि राष्ट्र जागरण अभियान पूरे देश का अभियान है। हर व्यक्ति, संगठन, भाषा, जाति, क्षेत्र और सम्प्रदाय का अभियान है। इसमे उत्तर प्रदेश को केंद्र मानकर काम किया जाएगा क्योंकि उत्तर प्रदेश में पूरे देश का आध्यात्मिक बल बसता है। कोई कारण है कि श्रीराम, श्रीकृष्ण उत्तर प्रदेश में पैदा हुए हैं। मथुरा, अयोध्या, काशी उत्तर प्रदेश में है। भक्ति काल के अधिकतर कवि उत्तर प्रदेश की मिट्टी से हैं। 1857 की क्रांति उत्तर प्रदेश से शुरू हुई। इस आध्यात्मिक बल के कारण हमने उत्तर प्रदेश को केंद्र बनाया है। बैठक में उन्होंने कहा कि सात भारत विरोधी मानसिकताएं अपना तन, मन, धन लगा कर भारत को तोड़ने का प्रयास कर रही हैं। हम लोग बंटे होने के कारण उनको पराजित नही कर पा रहे हैं। वामपंथी और उनके हथियारबंद गिरोह माओवादी और नकसलवादी, अलगाववादी, कट्टरवादी और आतंकवादी संगठन, बौद्धिक आतंकवादी, विधर्मी राजनैतिक दल, अंतर्राष्ट्रीय ताकतें, धर्मांतरण माफिया, विधर्मी कारपोरेट माफ़िया। यह सभी ताकतें एकजुट होकर हम से लड़ रही हैं और हमे खंड खंड में बांट कर पराजित करना चाहती हैं। कहा कि चार कारक भारत के भू-मनोविज्ञान को प्रभावित करते हैं। वो कारक हैं भाषा, जाति, क्षेत्र और सम्प्रदाय। भारतीय सनातन संस्कृति के अनुसार वैदिक काल मे प्रकृति को पूजा जाता था। जिन पांच तत्वों से हमारा शरीर बना है, उन्ही पांच तत्वों से यह सृष्टि बनी है। हम मानते हैं भगवान  मतलब भूमि, गगन, वायु, अग्नि और नीर। इसी कारण भारतीय संस्कृति का मूल प्रकृति से मैत्री है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से ही हम संस्कृति की ओर लौटेंगे। बैठक में व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष शिवचंद्र शुक्ल, बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पाण्डेय, चेयरमैन प्रतिनिधि रामगोपाल सिंह, सूरज सिंह, दुर्गाशंकर गुप्त, ऋषभ, पुष्पेंद्र, अमिताभ शुक्ल, बृजेश सिंह, कौटिल्य केसरवानी, अवधेश मिश्र, नास्त्रोदमस त्रिपाठी, उत्कर्ष, अभिषेक सिंह, जुगेश सिंह, बबलू सिंह, धुर्व सिंह, सार्थक अरोड़ा, शिवम शर्मा आदि रहे।