टीबी से ग्रस्त महिलाओं का चल रहा इलाज

 टीबी से ग्रस्त महिलाओं का चल रहा इलाज 



फतेहपुर। जिले में घर-घर स्वास्थ्य योजनाएं पहुंचाने के लिए विभाग प्रयासरत है। इसी क्रम में जनवरी 2022 से अब तक मिले 3300 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। इसमें 1416 महिलाएं भी हैं। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत अब गर्भवती के टीबी प्रबंधन की पूरी तैयारी है। इसके तहत गर्भवती के प्रसव पूर्व जांच में दो सप्ताह से खांसी व बुखार रहना, लगातार वजन कम होना और रात में पसीना आना जैसे लक्षण नजर आते हैं तो उनकी टीबी की जांच करायी जाएगी।

      नेशनल लेवल वर्चुअल प्रशिक्षण में यह बात निकलकर आई है कि उत्तर प्रदेश में हर साल करीब 8000 गर्भवती में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं। इन गर्भवती की समय से टीबी की जाँच और इलाज से गर्भवती के साथ ही गर्भस्थ शिशु को भी सुरक्षित बनाया जा सकेगा। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भी कमी लायी जा सकेगी ।राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने इस सम्बन्ध में प्रदेश के सभी जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को आवश्यक निर्देश भी जारी किये हैं।

        इसी क्रम में सूबे के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्वास्थ्य उप केन्द्रों, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर गर्भवती की सिम्टोमेटिक स्क्रीनिंग करायी जाए। सिम्टोमेटिक स्क्रीनिंग में जिन गर्भवती में टीबी के लक्षण नजर आयें उनको टीबी जांच केन्द्रों पर अवश्य रेफर किया जाए। जाँच में जिन गर्भवती में टीबी की पुष्टि होती है उनका समय से उपचार शुरू किया जाएगा।

        जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ अशोक गुप्ता ने बताया कि अगर गर्भवती महिला में टीबी के लक्षण दिखाई देते हैं तो इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए यह देरी गर्भस्थ शिशु और मां के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है स इसलिए टीबी के लक्षण दिखाई देने पर फौरन ईलाज शुरू कर दें स टीबी का इलाज सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क उपलब्ध है सनिर्देश के क्रम में जनपद स्तर पर किये जाने वाले प्रबन्धन के बारे में कहा गया है कि इसके लिए जनपद के अधिकारियों और कर्मचारियों का क्षमता वर्धन किया जाए और मातृत्व शिशु सुरक्षा कार्ड (एमसीपी कार्ड) पर स्क्रीनिंग लक्षणों को दर्ज किया जाए। इस सारी प्रक्रिया की समीक्षा और अनुश्रवण के लिए जरूरी सूचकांक (इंडेक्स) एचएमआईएस पोर्टल और निक्षय पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर तय किये गए हैं। जिला महिला चिकित्सालय के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. पीके गुप्ता का कहना है कि गर्भवती की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, ऐसे में उनके संक्रामक बीमारियों की चपेट में आने की गुंजाइश ज्यादा होती है। उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) वाली महिलाओं को तो खासतौर पर टीबी के संक्रमण से सुरक्षित बनाने की जरूरत है। 

बोले लाभार्थी ---

तुराबअली का पुरवा निवासी शकुंतला ने बताया कि उन्हे जांच में टीबी होने की जानकारी मिली। इसके बाद टीबी हास्पिटल से निःशुल्क दवायें और निक्षण पोषण योजना के तहत आर्थिक लाभ मिल रहा है। साथ ही पोषण किट भी प्राप्त हुई है दवाओं से अब आराम भी है। इसी प्रकार कृष्णा कालोनी निवासी सुमित्रा कहती हैं कि उन्हे एक महीने से लगातार खांसी आती थी। टीबी हास्पिटल में जांच कराने पर टीबी होने की बात सामने आई। अब उनका इलाज टीबी हास्पिटल से चल रहा हैै। उन्होंने बताया कि हर महीने पोषण किट मिलती है और दवायें भी आसानी से मिल रही है।

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