गैर जनपदख से आने वाले चिकित्सकों पर आखिर लगाम लगाने वाला कौन आएगा आगे

गैर जनपदख से आने वाले चिकित्सकों पर आखिर लगाम लगाने वाला कौन आएगा आगे 


सरकारी स्वास्थ सुविधा ना मिलने पर झोलाछाप डॉक्टरों का क्षेत्र बढ़ा


फतेहपुर।गैर जनपद से आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का मर्ज काफी पुराना है लेकिन बीमारियों का इलाज करने वाले चिकित्सक भी इस मर्ज़ से अछूते नहीं है। इसी बीमारी के चलते ही ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा कर रह गई है। चिकित्सकों के अभाव में यहां आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया नहीं हो पा रही।आने जाने वाले चिकित्सकों का इलाज करने वाला ना तो स्वास्थ विभाग के अधिकारी ही आगे आ रहे हैं और ना ही प्रशासनिक अधिकारी।
आम लोगों तक सस्ता इलाज पहुंच सके इसी बात को लेकर शहर व कस्बो से लेकर गांव तक करोडों रुपयो की लगती से अस्पताल बनाये गये। आलीशान इमारतें बनकर तैयार है।इन इमारतों में चिकित्सकों सहित स्वास्थ्य कर्मियों की पोस्टिंग भी कर दी गई है। लेकिन जब चिकित्सक ही रोज आने जाने वाले मर्ज़ से पीड़ित हो तो यहां आने वालों का इलाज कौन करेगा। कई चिकित्सक तो ऐसे है जो सप्ताह में एक या 2 दिन ही आते हैं। चिकित्सकों के ना आने पर ऐसे अस्पतालों को वार्ड बॉय या फिर pharmacist ही चलाते हैं।
स्वास्थ विभाग के आला अधिकारी भी ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले चिकित्सकों पर कुछ कम मेहरबान नहीं है ऐसे लापरवाह चिकित्सकों पर कार्रवाई करना तो दूर रहा बल्कि उनकी सुविधा के अनुसार ही उनकी उसी इलाके में नियुक्ति कर रखी है। कहने का मतलब यह है कि जिन सरकारी चिकित्सकों का इलाहाबाद से आना जाना है उन्हें खागा धाता और हथगाव इलाकों में नियुक्त किया गया है। जबकि कानपुर से आने वाले चिकित्सको को बिदंकी,अमोली खजुआ जहानाबाद क्षेत्रों में लगाया गया है। ऐसी सुविधा स्वास्थ विभाग के आला अधिकारी इन्हें दे कर रोज न आने वाले चिकित्सको का और भी हौसला अफजाई किया है। चिकित्सकों के अनुसार या उनके मनमाफिक नियुक्ति का सिलसिला नया नहीं है बल्कि यह सिलसिला काफी पुराना है।ऐसी सुविधा भोगी चिकित्सकों ने सरकार की मनसा को कुचल कर रख दिया है।जिसके कारण गरीब बेसहारा मरीज को सरकारी सुविधा मुहैया नहीं हो पा रही है। मरीज केवल करोड़ों की लागत की बनी इमारत को ही देखकर वापस लौट आता है। मरता क्या न करता वाली स्थिति इन गरीब मरीजों के सामने रहती है और छोला छाप डॉक्टरो के सामने जाने को मजबूर रहते हैं। आम लोगों के  बीच यह भी कहा जा रहा है कि सरकारी स्वास्थ सुविधा ना मिलने के कारण ही झोलाछाप डॉक्टरों का क्षेत्र बढ़ता जा रहा है यदि झोलाछाप डॉक्टर ना हो तो छोटे- छोटे मर्ज़ में ही मरीजों को जान से हाथ धोना पड़ सकता है।
       *धरती के भगवान कहे जाने वाले* लापरवाह चिकित्सकों का इलाज करने के लिए ऐसा लगता है कि ईश्वर को अब धरती पर अवतार लेना होगा,तभी लापरवाह चिकित्सकों को सुधारा जा सकता है। जिला मुख्यालय मे स्थित इकलौते जिला अस्पताल मे जिस तरह से कोरोना वायरस की महामारी में चिकित्सकों ने अपनी जान जोखिम में रखकर यहां आने वाले मरीजों का इलाज किया। उसको लेकर चर्चा करनी भी जरूरी है। इन्हें धरती का भगवान कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा। अब जरूरत है ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे ही चिकित्सकों की जो अपने स्वार्थों को त्याग कर सरकार की मंशा के अनुरूप गरीब बेसहारा लोगों को इलाज पहुंचाने के लिए आगे आए। सवाल तो आज स्वास्थ विभाग के आला अधिकारियों से पूछा जाना चाहिए कि जब प्रदेश सरकार स्वास्थ सुविधा मुहैया कराने के लिए अपने संकल्प को बार बार दोहरा रही है तो चिकित्सकों को भी आगे आना चाहिए। ग्रामीण लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराकर इन्हें झोलाछाप डॉक्टरों के शोषण से बचाना चाहिए।


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