दिल्ली में 10 दिन में कंट्रोल हो जाएगा कोरोना, दीवाली से पहले अरविंद केजरीवाल ने दिलाया भरोसा

दिल्ली में 10 दिन में कंट्रोल हो जाएगा कोरोना, दीवाली से पहले अरविंद केजरीवाल ने दिलाया भरोसा


नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने दीवाली से एक दिन पहले डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में कोरोनावायरस (Coronavirus) के बढ़ते मामलों की एक बड़ी वजह प्रदूषण है. उन्होंने इसका ठीकरा पड़ोसी राज्यों पर भी फोड़ा और कहा कि पराली जलने की वजह से पूरे उत्तर भारत में प्रदूषण फैल रहा है. उन्होंने कहा कि पराली जलाने की वजह से पूरे 1 महीने तक पूरा उत्तर भारत पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में धुआं ही धुआं होता है. उन्होंने कहा कि पिछले 10-12 साल से हर साल अक्टूबर और नवंबर में पराली जलने की वजह से पूरा उत्तर भारत परेशान रहता है.
आप नेता ने दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पराली की समस्या से किसान भी परेशान रहते थे लेकिन अब ऐसा नही होगा क्योंकि पूसा एग्रीकल्चर इन्स्टीट्यूट ने इसका समाधान निकाल लिया है. सीएम ने कहा कि वहां के वैज्ञानिकों ने ऐसा बायो डी कंपोजर बनाया है, जिसका घोल बनाकर छिड़कने से पराली 20 दिन के अंदर गल जाती है और खेतों में खाद बन जाती है. सीएम ने कहा कि दिल्ली सरकार ने दिल्ली 2000 एकड़ कृषि भूमि पर इसका छिड़काव करवाया है.


केजरीवाल ने बताया कि 24 गांव के अंदर 13 अक्टूबर से छिड़काव किया गया था, जिसके नतीजे आने शुरू हो गए हैं. वहां 20 दिन बाद 70-95% डंठल गल चुका है. पूसा इन्स्टीट्यूट ने भी इसकी रिपोर्ट दी है. उन्होंने कहा कि किसान इससे बहुत खुश हैं. केजरीवाल ने कहा कि पराली की समस्या का समाधान तो निकल गया है लेकिन अब बारी है राज्य सरकारों को जिम्मेदारी निभाने की. उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या दिल्ली के आसपास की राज्य सरकारें इसे लागू करेंगी या साल दर साल लोग प्रदूषण से इसी तरह जूझते रहेंगे?


केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने कई किसानों से बात की तो पता चला कि किसान भी पराली जलाना नहीं चाहते क्योंकि पराली जलाने की वजह से सबसे ज्यादा धुआं तो उनके अपने घरों में होता है. सीएम ने कहा कि मीडिया क्योंकि दिल्ली में है इसलिए दिल्ली का प्रदूषण तो दिखाता है लेकिन गांव का प्रदूषण नहीं दिखाता.  उन्होंने कहा," इस बारे में अभी तक कोई ठोस काम नहीं किया गया था. हर साल इस समय शोर होता है, उस पर  राजनीति होती है लेकिन काम नहीं होता. इस बार मैं पूसा इंस्टीट्यूट का धन्यवाद करना चाहता हूं कि उन्होंने इसका समाधान निकाल लिया है."


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