मन की बात में बोले पीएम मोदी-नए कृषि कानून से किसानों को मिले नए अधिकार

मन की बात में बोले पीएम मोदी-नए कृषि कानून से किसानों को मिले नए अधिकार


(न्यूज़)।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 'मन की बात' के जरिए देश को संबोधित किया।यह मन की बात का 71वां संस्करण था।इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कोरोना की स्थिति से लेकर किसान कानून पर अपने विचार साझा किए।पीएम मोदी ने नए कानून को लेकर कहा कि यह किसानों को नए अधिकार दे रहा है।यह खेती को नए आयाम देगा। इससे किसानों की परेशानियां दूर होंगी।इस दौरान पीएम मोदी ने कई अहम मुद्दों पर भी अपने विचार सामने रखे।मन की बात के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि संसद ने हाल ही में कठोर मंथन के बाद कृषि सुधार कानून पारित किया है।उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने न केवल किसानों की दिक्कतें कम हुई हैं बल्कि इस कानून ने उन्हें नए अधिकार और अवसर भी दिए हैं।पीएम मोदी ने कहा कि बीते दिनों हुए कृषि सुधारों ने किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं। बरसों से किसानों की जो मांग थी, जिन मांगों को पूरा करने के लिए किसी न किसी समय में हर राजनीतिक दल ने उनसे वायदा किया था,वो मांग पूरी हुई हैं। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से न सिर्फ किसानों के अनेक बन्धन समाप्त हुए हैं,बल्कि उन्हें नए अधिकार भी मिले हैं,नए अवसर भी मिले हैं।


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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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