प्रधान की मनमानी से ग्रामीण त्रस्त नहीं हो पा रहा रोड का निर्माण राशन लेने जाने में होती है ग्रामीणों को समस्या

प्रधान की मनमानी से ग्रामीण त्रस्त नहीं हो पा रहा रोड का निर्माण राशन लेने जाने में होती है ग्रामीणों को समस्या।


हुसैनगंज/फतेहपुर


 हुसैनगंज थाना क्षेत्र के ग्राम गौरा कला ब्लॉक भिटौरा मैं लंबे समय से ग्रामीणों के बार-बार शिकायत करने के बावजूद ग्राम प्रधान, ब्लाक प्रमुख, व सेक्रेटरी जनता की बात को दरकिनार कर रहे हैं। सरकारी राशन की दुकान धर्मेंद्र के यहां है जोकि गांव के सब के किनारे हिस्से अपना निवास बनवा कर रहते हैं। उनके घर के बगल से जाने वाला मार्ग आज भी कीचड़ से भरा हुआ है जिस पर निकल कर ग्रामीणों को राशन लेने जाना पड़ता है। 4 गांव के लोग राशन लेने के लिए कोटेदार धर्मेंद्र के यहां आते हैं।


लेकिन रास्ता ना होने की वजह से उन्हें कीचड़ में निकल कर आना जाना पड़ता है। वही ग्रामीणों ने बताया कि जब भी वह ग्राम प्रधान से मिलते हैं व रोड बनवाने की बात करते हैं तो वह आनाकानी कर बात को टाल देता है। मीडिया के बार-बार खबर चलाने के बावजूद अभी तक प्रशासन सचेत नहीं हुआ है। गौरा कला से होकर सात मील, हुसैनगंज को जाने वाला मुख्य मार्ग जो पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत आता है। उस मार्ग में भी पानी व कीचड़ भरा हुआ है। लोगों को आने जाने में काफी कठिनाई होती है। आए दिन कोई न कोई हादसा होता रहता है इन सब के बावजूद ग्राम प्रधान, वीडियो, व पीडब्ल्यूडी के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।


 क्या ग्रामीणों को यूं ही कीचड़ भरे रास्तों से गुजरना होगा।


 क्या इनकी सुनने वाला कोई नहीं है।
 आखिर कब मिलेगी ग्रामीणों को सड़क पर चलने की सहूलियत।सरकार को इस दिशा में सोचना होगा और ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण कर जल्द से जल्द सड़क का निर्माण करवाना होगा।


Popular posts
अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
चित्र
तू मेरी गीता पढ़ले मैं पढ़ लू तेरी कुरान, आपस मे भाई चारा निभा के बनायेगे नया हिंदुस्तान
चित्र
पाल सामुदायिक उत्थान समिति की ब्लाक इस्तरीय संगठनात्मक बैठक हुई सम्पन्न
चित्र
कानपुर में ठेले पर पान, चाट और समोसे बेचने वाले 256 लोग निकले करोड़पति
चित्र
योगी सरकार लोगों को देने जा रही फ्री वाईफाई सुविधा
चित्र