श्रीमद् भागवत कथा में भक्तों ने श्रवण की वामन अवतार की कथा

श्रीमद् भागवत कथा में भक्तों ने श्रवण की वामन अवतार की कथा


अमोली (जाफरगंज)। क्षेत्र के पासी बाबा नाम से विख्यात सिद्ध स्थान में श्रीमद् भागवत कथा चल रही है| वृंदावन से पधारी कथा वाचिका  देवी सत्यार्चा  ने कथा के दूसरे दिन कल भक्तों को महाराज शुकदेव जी का प्राकट्य श्रवण कराया।उन्होंने भक्तों को बताया कि किस प्रकार से 5 वर्ष के बालक ने अपने तपोबल के कारण ईश्वर की प्राप्ति कर ली| बाल्यावस्था में अर्थात मां के गर्भ से ही ईश्वर की प्राप्ति का रास्ता शुकदेव जी ने अपना लिया था| कथा व्यास सत्यार्चा जी ने   इसके उपरांत बामन भगवान की बड़ी ही मनोरम कथा भक्तों को श्रवण कराई| जिसमें राजा बलि से दान में भगवान विष्णु के अवतार बावन भगवान ने सब कुछ मांग लिया था| श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास के साथ वादक नरेश मस्ताना एवं वृंदावन से पधारे पैड में संगत कर रहे बासुदेव ब्रजवासी ने अपनी स्वर लहरी से कथा में चार चांद लगा दिए| रसमई संगीतमय स्वर लहरी से ओतप्रोत श्रीमद् भागवत कथा को श्रवण कर समस्त क्षेत्रवासी भाव विभोर हो गए।


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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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