12 दिसंबर को होगा राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

 12 दिसंबर को होगा राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन



फतेहपुर।सिविल जज सी0डि0/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण फतेहपुर आनन्द मिश्र ने बताया कि उच्चतम न्यायालय /कार्यपालक अध्यक्ष राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार दिनांक 12 दिसंबर 2020 दिन शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है । इस राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह समझौता के माध्यम से न्यायालयों में लंबित जुडिशल डाटा ग्रिड प्रदर्शित एवं प्रीलिटिगेशन के माध्यम से लोक अदालत में आपराधिक समनीय वाद, धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, बैंक वसूली वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद, वैवाहिक वाद, श्रम वाद, भूमि अधिग्रहण वाद, विद्युत एवं जल बिल विवाद ( असमनीय वादों को छोड़कर)वेतन, भत्तों एवं सेवानिवृत्ति लाभों से संबंधित सेवा प्रकरण, राजस्व वाद, अन्य दीवानी वाद (किराएदारी, सुखाधिकार , निषेधाज्ञा वाद एवं विशिष्ट अनुतोष आदि) निस्तारित किए जाने हेतु निर्देशित किया गया है ।

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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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