यूथ आईकॉन डॉ अनुराग श्रीवास्तव ने धारूपुर गांव के 580 व्यक्तियों तथा भरसवा स्थित ग्रामोद्योगिक इंटर कॉलेज 200 बच्चों को वितरित की दवाएं

 यूथ आईकॉन डॉ अनुराग श्रीवास्तव ने धारूपुर गांव के 580 व्यक्तियों तथा भरसवा स्थित ग्रामोद्योगिक इंटर कॉलेज 200 बच्चों को वितरित की दवाएं



फतेहपुर। डॉ सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन के तत्वाधान एवं अनुराग होमियो क्लीनिक व श्री साई होमियो हाल के संयुक्त संयोजकत्व में यूथ आइकॉन डॉ अनुराग श्रीवास्तव द्वारा ग्राम धारुपुर के 580 व्यक्तियों व भरसवा स्थित ग्रामोद्योगिक इंटर कालेज के 200 बच्चों व उनके परिवार के सभी सदस्यों हेतु कोरोना के विरुद्ध रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने हेतु होमियोपैथिक औषधि का वितरण किया गया।डॉ अनुराग श्रीवास्तव ने सभी को वैक्सीन आने तक साबुन से हाथ धुलने, मुँह को मास्क से ढकने व सोशल डिस्टनसिंग का पालन करने हेतु जागरूक किया साथ ही सभी को जल संरक्षण व घरों से निकलने वाली प्लास्टिक को बोतल में भरकर इकोब्रिक बनाने फिर इन इकोब्रिकस से क्यारियां इत्यादि बनाने हेतु जागरूक किया जिससे प्लास्टिक हमारे घर के कूड़े के माध्यम से बाहर निकलकर पर्यावरण को प्रदूषित न कर पाएं।इस अवसर पर धारुपुर ग्राम प्रधान मनोज,श्याम शरण श्रीवास्तव, अजय तिवारी,विद्यालय के प्रधानाचार्य बेचनराम सरोज,ओम प्रकाश शुक्ल,आलोक शुक्ल,राजेश श्रीवास्तव, जगमोहन सहित प्रमुख सहयोगी अभिनव श्रीवास्तव एवं भोजनजनसेवा समिति के कुमार शेखर उपस्थित रहे।

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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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