शहर में लगा रहा घंटों जाम रेंगते रहे वाहन।

 शहर में लगा रहा घंटों जाम  रेंगते रहे वाहन।


फतेहपुर।

 शहर कोतवाली क्षेत्र के बांदा टांडा मार्ग पर आज सुबह तकरीबन 4 घंटे तक भीषण जाम लगा रहा जिससे आवागमन अवरोधित रहा शहर के विष्णुपुरी कॉलोनी के आगे पीएसी गेट के पास कुछ लोगों के पाइप लाइन को फाड़ देने की वजह से और रोड पर पानी भरा हुआ है। जिससे आए दिन कोई ना कोई वाहन वहां फंस जाता है आज सुबह तकरीबन तीन से चार ट्रक इस गड्ढे में फंसे हुए थे जिस कारण शहर में बुरी तरह से जाम लग गया और लोगों को आने जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। आनन-फानन में प्रशासन ने जेसीबी बुलवाकर गाड़ियों को निकलवाया जिससे रास्ता  साफ हुआ और वाहनों का आवागमन शुरू हुआ पीडब्ल्यूडी और सांसद, विधायक की लापरवाही के कारण बांदा - टांडा मार्ग का निर्माण नहीं हो पा रहा है। जिससे आए दिन कोई न कोई हादसा हो रहा है। और प्रतिदिन जाम लग रहा है इन सबके बावजूद सड़क पर इस कदर धूल मिट्टी उड़ती है कि लोग दमा के मरीज होते जा रहे हैं लेकिन अन्य सड़कों पर सरकार टीप- मरम्मत का काम कर रही है। लेकिन बांदा टांडा मार्ग पर अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। जानकारों से इस बाबत बात करने पर कि कब तक रोड का निर्माण होगा वह भी बताने  में असमर्थ है। बार-बार जिलाधिकारी महोदय, नगर पालिका, पीडब्ल्यूडी, विधायक व सांसद को सूचित करने पर भी आज तक बाँदा- टांडा मार्ग का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है ।ना जाने कब तक इस सड़क का कार्य शुरू होगा और लोग हादसों से बचेंगे तथा सुरक्षित अपने घर पहुंचेंगे।

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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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