मिलावटी शहद पर जल्द कसेगा शिकंजा,सरकार बना रही है नए नियम

 मिलावटी शहद पर जल्द कसेगा शिकंजा,सरकार बना रही है नए नियम



(न्यूज़)।केंद्र सरकार जल्द ही ऐसे नए नियम कानून बनाने जा रही है जिससे शहद में होने वाले मिलावटी पदार्थों के देश में आयात पर लगाम लग सके।सूत्रों के जरिए मिली जानकारी के मुताबिक वाणिज्य मंत्रालय फ्रक्टोज सिरप यानि शुगर सिरप को प्रतिबंधित कैटेगरी में डालते हुए इस पर ड्यूटी भी बढ़ा सकता है।साथ ही इसके इम्पोर्ट को लेकर नए सिरे से गाइडालाइंस जारी की जा सकती है।जानकारी के मुताबिक पेंट-पिंगमेंट की आड़ में इस सिरप का इम्पोर्ट बड़े पैमाने पर हो रहा है जिसके चलते न सिर्फ घरेलू शहद निर्माताओं को मुश्किल उठानी पड़ती है बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी धक्का लग रहा है।ऐसे में सरकार इसके लिए आयात का कोटा निर्धारित करने पर विचार कर रही है।नए कदमों से पेंट कंपनियों के नाम पर आयात होने वाले फ्रक्टोज सिरप पर सख्ती हो पाएगी।मामले से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक खुद प्रधानमंत्री भी जल्द ही इसके समाधान चाहते है।खादी और ग्रामोद्योग आयोग की तरफ से भी इस बारे में वाणिज्य मंत्रालय को शहद उद्योग को हो रहे नुकसान से जुड़ी रिपोर्ट दी जा रही है जिसपर अमल करते हुए नए नियम बनेंगे।

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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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