कृषि कानून के विरोध में विकलांग कल्याण सहायता समिति प्रबंधक जितेंद्र मिश्रा अष्टावक्र ने किया केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के विरुद्ध धरना प्रदर्शन

 कृषि कानून के विरोध में विकलांग कल्याण सहायता समिति प्रबंधक जितेंद्र मिश्रा अष्टावक्र ने किया केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के विरुद्ध धरना प्रदर्शन


----- केंद्र व राज्य सरकार विरोधी लगाए नारे

बिंदकी फतेहपुर

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों को लेकर लगातार विरोध बढ़ता जा रहा है इसी के चलते सोमवार को अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद विकलांग कल्याण सहायता समिति द्वारा कांग्रेश पार्टी के बैनर तले एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया

        जानकारी के अनुसार नगर के मोहल्ला महरहा रोड स्थित राजकीय बस स्टॉप परिसर में सोमवार को कृषि कानून के विरोध में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद विकलांग कल्याण सहायता समिति के अध्यक्ष तथा कांग्रेश नेता जितेंद्र मिश्र उर्फ अष्टावक्र के नेतृत्व में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया इस मौके पर जितेंद्र मिश्र उर्फ अष्टावक्र ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया कृषि कानून किसान विरोधी है सरकार लगातार किसानों के खिलाफ काम कर रही है देश का किसान परेशान है दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन को केंद्र सरकार कुचलने का प्रयास कर रही है किसानों की बात सुनना चाहिए और कानून वापस लेना चाहिए इस मौके पर अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद विकलांग कल्याण समिति के राकेश सक्सेना अरुण शुक्ला सुनील दुबे विनोद भाटी सुमित बाजपेई सर्वेश कुमार रामचरण यादव शुभम सिंह मूर्ति देवी सहित तमाम लोग मौजूद रहे

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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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