सरकार के गड्ढा मुक्त सड़कों का दावा हुआ फेल

 दर्द से कराह रहा शहर फतेहपुर जिम्मेदारों को नहीं हो रही इसकी सुध



फतेहपुर।आज जहां पूरे भारतवर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के  द्वारा सबका साथ सबका विकास का नारा लगाया जा रहा है  तथा स्वच्छ भारत मिशन व गड्ढा मुक्त सड़क का नारा दिया जा रहा है। वही उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में लोगों को आए दिन जान के खतरों से खेलना पड़ रहा है।

 ज्ञात हो कि शहर कोतवाली क्षेत्र के नाउवाबाग से लेकर शाह कस्बे तक बांदा टांडा मार्ग का हाल इस कदर खस्ताहाल है कि छोटे से लेकर बड़े वाहन तक निकलने में असमर्थ हो जाते हैं। आए दिन इस सड़क पर दर्जनों की संख्या में वाहन फंसे रहते हैं जिस कारण से शहर में अत्यधिक मात्रा में जाम लगता है। इतना ही नहीं सड़क से उठने वाला  धूल का गुबार लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे होने से न सिर्फ लोगों को आने-जाने में दिक्कतें हो रही हैं बल्कि आए दिन कोई न कोई हादसा हो रहा है। जिससे कईयों को तो अपनी जान से हाथ धोना पड़ गया है। सड़क से उठने वाले धूल के गुबार इस कदर भयावह है कि पीछे चलने वाले लोगों को आगे के वाहन सही से दिखाई भी नहीं देते जिस कारण आए दिन हादसे हो रहे है। शहरी नागरिक जो बांदा टांडा मार्ग पर अपना मकान बनवा कर रहे हैं। उनके घरों पर अत्यधिक मात्रा में धूल भर जाती है तथा लोग तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा इस सड़क पर रहने वाले व इस सड़क से हमेशा गुजरने वाले लोग दमा के शिकार होते जा रहे हैं। इन सबके बावजूद प्रशासन ने सुस्ती दिखा रखी है।

आज तकरीबन साल भर से इस सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे हैं लेकिन विकास कार्य के नाम पर सिर्फ गड्ढों पर मिटटी डलवा दी जाती है या फिर पत्थर डलवाए जाते हैं। लेकिन निर्माण कार्य नहीं करवाया जा रहा है। प्रशासन को जवाब देना होगा आखिर कब तक शहर वासियों को गड्ढा युक्त रोड, धूल मिट्टी से भरे रास्तों से निकलना पड़ेगा। यह फतेहपुर की विडंबना ही है कि इस छोटे से शहर में जहां दो मंत्री व चार विधायक मौजूदा हालत में होने के बावजूद शहर में निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। सिर्फ बांदा टांडा मार्ग ही नहीं जिले में कई ऐसी सड़कें हैं। जिनका का निर्माण अभी तक नहीं हुआ है सत्ता में बैठे  सत्ता धारियों को जनता की समस्याओं को देखना होगा व सड़क निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू करवाना होगा जिससे कि लोग सुरक्षित अपने घरों को पहुंच सकें।