कृष्ण सुदामा की मित्रता आज भी प्रसांगिक-आचार्य राघव जी

 कृष्ण सुदामा की मित्रता आज भी प्रसांगिक-आचार्य राघव जी



कथा मे राघव जी ने कहा फ्रेडशिप डे मात्र बाजारवाद


होली गीत,महारास मे भावविभोर हो झूमे भक्त

विंदकी फतेहपुर।अमौली ब्लॉक के ग्राम बबई के महामहेश्वर धाम मे वतन की रक्षा के लिए 1965 में भारत पाकिस्तान के युद्ध मे दुश्मनों से लोहा लेते हुए उनके तीन टैंकरों को ध्वस्त करने वाले प0 राम दुलारे तिवारी कि स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन दिवस पर कथा व्यास आचार्य राघव जी महाराज ने उद्धव-गोपी प्रसंग,फूलो की होली,कृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग,परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई।कृष्ण सुदामा की मित्रता की कथा में श्रोताओं की आंखों से आंसू छलक पड़े।कथा मे मुख्य रूप से पहुचे अमौली से प्रकाशवीर आर्य,युवा विकास समिति के जिला प्रवक्ता आलोक गौड,समाजसेवी ऋषभ सिंह परिहार ने व्यास पीठ की आरती कर पूजन कर आशिर्वाद प्राप्त किया।इस दौरान आचार्य जी को अंगवस्त्र व प्रतीक चिन्ह देकर धर्म के प्रचार प्रसार के लिये सम्मानित किया गया।आचार्य राघव ने कहा भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में मित्रता को अत्यधिक महत्व दिया गया है।पश्चिमी देशों में फ्रेंडशिप डे मनाने की परंपरा तो अभी कुछ दशक पुरानी है,परन्तु हमारे यहां हर युग में दोस्ती की एक कहानी है।फ्रेडशिप डे मात्र बाजारवाद है।मर्यादा पुरुषोत्तम राम की सुग्रीव से मिताई हो या लीला पुरुष कृष्ण की सुदामा से,ये दोनों मित्रता के प्रतिमान हैं।जिससे लोग आज भी प्रेरित होते हैं।आज भी कृष्ण और सुदामा की मित्रता प्रसांगिक है।उन्होने नरोत्तम दास के सुदामा चरित की पक्तिया 'पानी परात के हाथ छुओ नहि, नैन के जल सो पग धोय'... को सुनाकर श्रोताओ को भावविभोर कर दिया।उन्होने कहा कृष्ण के दरबार में पहुंचे सुदामा के पग मित्र कृष्ण आंसुओं से ही धो देते हैं।कृष्ण कहते हैं कि मित्र कष्ट में है तो राज-पाट भी बेकार है।कहा कि कृष्ण-सुदामा की मित्रता आर्थिक,जाति,सामाजिक स्तरीकरण सभी पर भारी है।मानस मे गोस्वामी जी ने लिखा है जिन मित्र दुख होही दुखारी,तिनही विलोकत पातक भारी...राघव जी ने कहा जो अपने मित्र के दुख में दुखी नहीं होता वैसे व्यक्ति को देखना भी पाप का भागी बनना है।कथा व्यास ने महारास की कथा सुनाई तो भजनो मे श्रद्धलुओ ने झूमकर नृत्य किया।ब्रज की होली का वृतांत सुनाया तो गीत आज ब्रज मे होली रे रसिया...मे भक्त झूमने लगे,फूलो की बौझार व विभिन्न झाकिया प्रस्तुत कर होली को आकर्षण बना दिया।कथा समापन पर आरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया।प्रमुख रूप से महेश शुक्ल,रानी देवी,ओम प्रकाश,जगदीश प्रसाद,जनार्दन प्रसाद आदि रहे।

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