बुन्देलखंड के कृषकों के हित में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्ववद्यिालय

 बुन्देलखंड के कृषकों के हित में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्ववद्यिालय 



बाँदा संवाददाता।निरन्तर नई-नई उपलब्धियों को अर्जित कर रहा है। इसी कड़ी में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा अलसी एवं तिल में तीन नई उन्नत प्रजातियों का विकास किया गया है।

3 फरवरी, 2021 को उ0प्र0 राज्य बीज विमोचन उपसमिति, लखनऊ के 58वीं बैठक में अलसी की एलएमएस 2012-42 (बीयूएटी अलसी-3) तथा तिल की एमटी 2013-3 (बीयूएटी अलसी-1) प्रजातियो को भी विमोचन के लिए अनुससिंत किया गया।

इसके अलावा 9 नवम्बर, 2020 को आयोजित भारत सरकार की केन्द्रीय फसल मानक नाॅटीफिकेशन एवं विमोचन उपसमिति की 85वीं बैठक में विश्वविद्यालय द्वारा विकसित अलसी की एलएमएस 2015-31 (बीयूएटी अलसी-4) को विमोचित किया गया।ये प्रजातियां बुन्देलखंड क्षेत्र तथा आस-पास के अन्य राज्यों के किसानों के लिए विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान मानी जा रही है।

कृषि विश्वविद्यालय बांदा के कुलपति डाॅ. यू.एस. गौतम ने अपने वैज्ञानिकों के इस बड़ी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की तथा क्षेत्र व देश के किसानों के लिए उपयोगी तकनीकियों के सतत विकास के लिए प्रयत्नशील रहने के लिए हौसला आफजाई की।

कुलपति ने विश्वविद्यालय के शोध निदेशालय के अधिकारियों तथा इन प्रजातियों की इजात करने वाले वैज्ञानिक डाॅ. वी.पी. नगाइच, डाॅ. पी.के. सोनी, डाॅ. एम.एम. तिवारी (स्व.), डाॅ. ए.सी. मिश्रा तथा डाॅ. सी.एम. सिंह को बधाई देते हुए साधुवाद दिया।

ज्ञात हो कि, कृषि विश्वविद्यालय, बांदा के वैज्ञानिकों के द्वारा बुन्देलखण्ड में उत्पादित होने वाली दलहन, तिलहन व खाद्यान वाली फसलों पर शाोध कार्य किया जा रहा है। शोध के लिए विभिन्न परियोजनाओं संचालित हो रही है।

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