प्लेटफार्म से जुड़ेंगे किसान डिजिटल

 प्लेटफार्म से जुड़ेंगे किसान डिजिटल



न्यूज़।सबसे अधिक कृषकों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की राशि पहुंचाने का पहला पुरस्कार मिलने से उत्साहित सरकार अब सूबे के काश्तकारों को डिजिटल प्लेटफार्म पर लाकर उन्हें हाइटेक बनाने की तैयारी में है। इसके तहत कृषि विभाग में पंजीकृत 2.48 करोड़ किसानों को उन्नत कृषि तकनीक से लेकर मौसम की जानकारी, योजनाओं का लाभ एवं बाजार भाव तक काश्तकारों को एक क्लिक पर उपलब्ध होंगे। अर्थात बीज से बाजार तक की हर जानकारी पलक झपकते मिल जाएगी। आउटसोर्सिंग करने वाली जो कंपनियां इस पोर्टल पर नहीं आएंगी, उनका जेम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन रद्द होगा। यूपी के सभी बेरोजगारों को भी इसी सेवायोजन पोर्टल पर पंजीयन करवाना होगा। साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन अब पहले से पंजीकृत बेरोजगारों से पूछेगी कि अभी वह कौन सा काम कर रहे हैं।मुख्यमंत्री की पहल पर उत्तर प्रदेश कामगार और श्रमिक सेवायोजन व रोजगार आयोग पारदर्शी तरीके से और सबको समान अवसर के जरिए रोजगार दिलाने की पहल शुरू कर रहा है। हाल ही में आयोग की कार्यकारी परिषद ने कई अहम निर्णय लिए हैं। हर जिले को अपना डिस्ट्रिक्ट रोजगार प्लान बनाना होगा।

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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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