समाज के लिए दहेज कलंक है, इसे दूर करना हमारी जिम्मेदारी--मारूफ खान

      समाज के लिए दहेज कलंक है, इसे दूर करना हमारी जिम्मेदारी--मारूफ खान


 

गिरिराज शुक्ला

बिन्दकी फतेहपुर -ऑल इंडिया हज वेलफेयर सोसाइटी के युवा जिला अध्यक्ष मारूफ खान ने अपने जिला कार्यालय मोहल्ला मुगलाही  मे पत्राकारो से  प्रेस वार्ता में कहा कि  आयशा नामक लड़की की खुदकुशी और दहेज के इल्जाम  सामने आने की बात पर अफसोस जाहिर किया, उन्होंने कहा कि आयशा की ख़ुदकुशी की वजह दहेज की मांग को बताया जा रहा है अगर दहेज खुदकुशी की वजह है तो हमें इस बात के लिए शर्मिंदा होना चाहिए हमें इस बात को सोचना चाहिए कि हमारे समाज में दहेज का चलन क्यों है। जबकि इस्लाम में विवाह को आसान करने को बताया गया है। इस्लाम के आखरी नबी ने भी कहा निकाह को आसान करें। बा हैसियत मुस्लिम हमारी इस्लामी और नैतिक जिम्मेदारी है कि हम अपनी नस्लों की तरबियत और अपना सामाजिक स्तर इस्लाम के उसूलों के आधार पर बनाए जिसमें औरतों, बच्चो, कमजोरों, यतीमो और विधवाओं का आदर करना और सम्मान देना हमारी जिंदगी गुजारने के लिए एक दूसरे के साथ सम्मान पूर्वक व्यवहार करना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि दहेज की मांगों के कारण समाज में खुदकुशी जैसी बातों का सामना करना पड़ रहा है जो कि बेहद अफसोस नाक है!

उन्होंने कहा दहेज हमारे समाज के लिए कलंक है हमें चाहिए कि अपने बच्चों की ऐसी परवरिश करें कि निराशा उनके पास भी ना आ सके और खुदकुशी जैसे गंदे विचारों के दिमाग में भी ना आए साथ ही बच्चियों की विदाई के बाद भी हमें उनके साथ ताल्लुक जोड़ कर रखना चाहिए कि वह ससुराल में विभिन्न परिस्थितियों में किसी भी हाल में अकेलापन महसूस ना करें हम सबको मिलकर दहेज नामक इस कलंक से समाज को मुक्त करना होगा।

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