राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान योजना अंतर्गत नवनिर्वाचित प्रधानों को दिया गया एक दिवसीय ऑनलाईन प्रशिक्षण

 राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान योजना अंतर्गत नवनिर्वाचित प्रधानों को दिया गया एक दिवसीय ऑनलाईन प्रशिक्षण



 बिंदकी फतेहपुर।विकासखंड अमौली के डिघरुवा ग्राम सभा  के मजरे रूसिया में  प्रधान प्रशिक्षण शिविर लगाया गया जिसमें प्रधानों को स्वास्थ्य शिक्षा एवं महिला बाल विकास को बल देने का प्रयास किया गया एडीओ पंचायत के द्वारा समस्त प्रधानों को कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार ढंग से बताया गया ।प्रत्येक कार्य में किस प्रकार से टीम गठित की जाती है टीम मेंबर कितने होते हैं और किस-किस जाति विशेष के लिए जाते हैं ।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संजय सिंह उमराव ने बताया कि इस कार्यक्रम से प्रधानों में जागरूकता का विकास होगा एवं नवनिर्वाचित प्रधान अपने अपने कार्यों को बेहतर तरीके से समझ कर अपने अपने क्षेत्र का संपूर्ण विकास करवाएंगे ।उन्होंने बताया कि हर प्रधान को अपने अपने अधिकारों के बारे में विस्तार ढंग से जानकारी दी गई है ।अपनी अपनी ग्राम सभा में किस प्रकार से समितियों का गठन करना है। इस बार एवं ही प्रमुखता से बताया गया है कि कार्यक्रम के अंत में संजय सिंह उमराव ने प्रत्येक प्रधानों को डायरी और पेन एवं मास्क बांट कर माल्यार्पण करके सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में प्रमुख तौर से देवरी बुजुर्ग प्रधान गौरव त्रिवेदी, बसफ़रा प्रधान  संध्या देवी प्रतिनिधि राकेश यादव, दरियापुर छेदिया प्रधान  अरविंद वर्मा,  नसेनिया प्रधान  नवल किशोर आदि तीन न्याय पंचायतों के विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रधान गण मौजूद रहे।

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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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