स्वरूपलीन संत सुख स्वरूप उर्फ राजा साहेब की पुण्य स्मृति में कबीर सत्संग सेवा समिति खागा के तत्वावधान में तीन दिवसीय 28 वां कबीर सत्संग व भण्डारा सम्पन्न

 स्वरूपलीन संत सुख स्वरूप उर्फ राजा साहेब की पुण्य स्मृति में कबीर सत्संग सेवा समिति खागा के तत्वावधान में तीन दिवसीय 28 वां कबीर सत्संग व भण्डारा सम्पन्न



फतेहपुर।स्वरूपलीन संत सुख स्वरूप उर्फ राजा साहेब की पुण्य स्मृति में कबीर सत्संग सेवा समिति खागा के तत्वधान में तीन दिवसीय सतगुरु कबीर आध्यात्मिक सत्संग का 28 वां समारोह व भंडारे के कार्यक्रम का आयोजन कस्बे के नगर पंचायत परिसर में आयोजित किया गया। 

इस कबीर सत्संग समारोह में बाहूपुर बाराबंकी ,लखनऊ,  कौशांबी ,बैरी फतेहपुर, गुजरात, आदि मुख्य वक्ता तथा आयोजक संत शंकर दास व संत  विवेक दास मौजूद रहे।

खागा कस्बे के नगर पंचायत परिसर में तीन दिवसीय 28 वां कबीर सत्संग में संत गुरु रमन साहिब साध्वी राजेश्वरी देवी संत विकास साहेब संत प्रकाश साहेब संत केवल साहेब संत कमल साहेब, भजन गायकों में संत ध्यान साहेब, संत  विचार साहेब संत रविंद्र साहेब, संत  गुरु चरण साहेब, आदि मुख्य वक्ताओं ने अपने अपने विचारों से समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया और विस्तार पूर्वक अच्छे आचरण अपनाने को प्रेरित किया। वही इस कार्यक्रम के आयोजक संतशंकर दास ने लोगों का जीवन धन-धान्य हासिल कराते हुए बताया कि कबीर मानव विकास के प्रकाश स्तंभ है ,साथ ही मानव एकता का अनूठा संगम भी उनके जीवन का हर पाशर्व अपने में संपूर्ण और ज्योति मय है। उनकी दृष्टि में पवित्र भावना से किया गया हर कर्म पूजा ,उनका संदेश है तन से कर्म परायण होना किंतु मन से आत्म परायण उनकी वाणी या मानव मात्र को निष्पक्षता पूर्वक सत्य को समझने एवं आ चरित करने को प्रेरित करती है। समता पूर्वक जीवन जीते हुए आत्मलीन होने को उसका फल परमानंद और परम शांति है। अतः सदगुरु कबीर के विचारों के प्रचार प्रसार के उद्देश्य को लेकर सत्संग भजन का आयोजन किया गया उन्होंने  बताया कि इस कार्यक्रम का शुभारंभ 7 नवंबर 2021 से शुभारंभ किया गया और इसका समापन 9 नवंबर 2021 को दिन मंगलवार की शाम भंडारा उपरांत किया गया। और संतों के सत्संग भजन के साथ साथ भंडारे का भी आयोजन किया गया तथा इन्होंने बताया कि मंगलवार की शाम भंडारे के आयोजक कबीर भक्त सरजू प्रसाद गुप्ता के द्वारा संपन्न कराने के उपरांत व समस्त संतों की विदाई कर समापन किया गया।