राष्ट्रीय लोक अदालतों में एक साल में निस्तारित हुये एक करोड़ से ज्यादा मामले -अनुराधा शुक्ला फतेहपुर।जिला विधिक सेवा प्रधिकरण सचिव पूर्ण कालिक श्रीमती अनुराधा शुक्ला ने बताया है कि इस बार लोक अदालत की थीम एक मुट्ठी आसमा है ये थीम गरीबों तथा समाज के हासिये पर रहने वाले वर्गों के लिए भरोसा, द्रष्टनिश्चत तथा आशा का प्रतीक है उन्होंने कहा कि विधिक सेवा प्रधिकरणो का गठन समाज के कमजोर वर्गो को मुक्त एवं सक्षम विधिक सेवाओं को प्रदान करने के लिए किया गया है कि आर्थिक या किसी अन्य करणो से कोई भी नागरिक न्याय पाने से वंचित न रहे, का गठन लोक अदालत का आयोजन करने के लिये भी किया गया है जिससे न्यायिक प्रणाली सामान्य अवसर के आधार पर सबके लिये न्याय शुगम बना सके पूर्ण कालिक सचिव ने कहा कि लोक अदालत कानूनी विवादों का सुला की भवना से न्यायालय से बाहर समाधान करने का वैकल्पिक विवाद निष्पादन का अभिनव तथा सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम है, जहां आपसी सूझ बूझ से विवादों का समाधान किया जाता है लोक अदालत सरल एवं अनोपचारिक प्रक्रिया को अपनाती है तथा विवादों का अभिलम्ब निपटारा करती है। इसमें पक्षकारों को कोई शुल्क भी नही लगता है लोक अदालत से न्यायालय में लंबित मामले का निष्पादन होने पर पहले से भुगतान किये गये अदालती शुल्क को भी वापस कर दिया जाता है। लोक अदालत का आदेश फैसला अंतिम होता है। जिसके खिलाफ अपील नही की जा सकती है लोक अदालत से मामले के निपटारे के बाद दोने पक्ष विजेता रहते है तथा उनमें निर्णय से पूर्ण सन्तुष्ट की भवना रहती है। सचिव पूर्ण कालिक ने बताया की राष्ट्रीय विधिक सेवा प्रधिकरण में जन-जन न्याय की इस तीव्र प्रणाली को पहुचाया है और अदालतों के बोझ बड़े पैमाने तक घटाया है। सचिव पूर्ण कालिक ने बताया कि न्यायमूर्ति एन0वी0 रमन्ना, मुख्य न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय ,मुख्य संरक्षक एवं मा0 न्यायमूर्ति यू0यू0ललित,न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय/कार्यपालक अध्यक्ष राष्ट्रीय विधिक सेवा प्रधिकरण (नालसा) के कुशल निर्देशन में विगति एक वर्ष (2021)में राष्ट्रीय लोक अदालतों के माध्यम से सम्पूर्ण भारत में एक करोड़ से अधिक निस्तारण/निपटारा किया गया है।

 राष्ट्रीय लोक अदालतों में एक साल में निस्तारित हुये एक करोड़ से ज्यादा मामले -अनुराधा शुक्ला


फतेहपुर।जिला विधिक सेवा प्रधिकरण  सचिव पूर्ण कालिक  श्रीमती अनुराधा शुक्ला ने बताया है कि इस बार लोक अदालत की थीम एक मुट्ठी आसमा है ये थीम गरीबों तथा समाज के हासिये पर रहने वाले वर्गों के लिए भरोसा, द्रष्टनिश्चत तथा आशा का प्रतीक है उन्होंने कहा कि विधिक सेवा प्रधिकरणो का गठन समाज के कमजोर वर्गो को मुक्त एवं सक्षम विधिक सेवाओं को प्रदान करने के लिए किया गया है कि आर्थिक या किसी अन्य करणो से कोई भी नागरिक न्याय पाने से वंचित न रहे, का गठन लोक अदालत का आयोजन करने के लिये भी किया गया है जिससे न्यायिक प्रणाली सामान्य अवसर के आधार पर सबके लिये न्याय शुगम बना सके पूर्ण कालिक सचिव ने कहा कि लोक अदालत कानूनी विवादों का सुला की भवना से न्यायालय से बाहर समाधान करने का वैकल्पिक विवाद निष्पादन का अभिनव तथा सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम है, जहां आपसी सूझ बूझ से विवादों का समाधान किया जाता है लोक अदालत सरल एवं अनोपचारिक प्रक्रिया को अपनाती है तथा विवादों का अभिलम्ब निपटारा करती है। इसमें पक्षकारों को कोई शुल्क भी नही लगता है लोक अदालत से न्यायालय में लंबित मामले का निष्पादन होने पर पहले से भुगतान किये गये अदालती शुल्क को भी वापस कर दिया जाता है। लोक अदालत का आदेश फैसला अंतिम होता है। जिसके खिलाफ अपील नही की जा सकती है लोक अदालत से मामले के निपटारे के बाद दोने पक्ष विजेता रहते है तथा उनमें निर्णय से पूर्ण सन्तुष्ट की भवना रहती है। सचिव पूर्ण कालिक ने बताया की राष्ट्रीय विधिक सेवा प्रधिकरण में  जन-जन न्याय की इस तीव्र प्रणाली को  पहुचाया है और अदालतों के बोझ बड़े पैमाने तक घटाया है।

सचिव पूर्ण कालिक ने बताया कि  न्यायमूर्ति एन0वी0 रमन्ना, मुख्य न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय ,मुख्य संरक्षक एवं मा0 न्यायमूर्ति यू0यू0ललित,न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय/कार्यपालक अध्यक्ष राष्ट्रीय विधिक सेवा प्रधिकरण (नालसा) के कुशल निर्देशन में विगति एक वर्ष (2021)में राष्ट्रीय लोक अदालतों के माध्यम से सम्पूर्ण भारत में एक करोड़ से अधिक निस्तारण/निपटारा किया गया है।



फतेहपुर।जिला विधिक सेवा प्रधिकरण  सचिव पूर्ण कालिक  श्रीमती अनुराधा शुक्ला ने बताया है कि इस बार लोक अदालत की थीम एक मुट्ठी आसमा है ये थीम गरीबों तथा समाज के हासिये पर रहने वाले वर्गों के लिए भरोसा, द्रष्टनिश्चत तथा आशा का प्रतीक है उन्होंने कहा कि विधिक सेवा प्रधिकरणो का गठन समाज के कमजोर वर्गो को मुक्त एवं सक्षम विधिक सेवाओं को प्रदान करने के लिए किया गया है कि आर्थिक या किसी अन्य करणो से कोई भी नागरिक न्याय पाने से वंचित न रहे, का गठन लोक अदालत का आयोजन करने के लिये भी किया गया है जिससे न्यायिक प्रणाली सामान्य अवसर के आधार पर सबके लिये न्याय शुगम बना सके पूर्ण कालिक सचिव ने कहा कि लोक अदालत कानूनी विवादों का सुला की भवना से न्यायालय से बाहर समाधान करने का वैकल्पिक विवाद निष्पादन का अभिनव तथा सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम है, जहां आपसी सूझ बूझ से विवादों का समाधान किया जाता है लोक अदालत सरल एवं अनोपचारिक प्रक्रिया को अपनाती है तथा विवादों का अभिलम्ब निपटारा करती है। इसमें पक्षकारों को कोई शुल्क भी नही लगता है लोक अदालत से न्यायालय में लंबित मामले का निष्पादन होने पर पहले से भुगतान किये गये अदालती शुल्क को भी वापस कर दिया जाता है। लोक अदालत का आदेश फैसला अंतिम होता है। जिसके खिलाफ अपील नही की जा सकती है लोक अदालत से मामले के निपटारे के बाद दोने पक्ष विजेता रहते है तथा उनमें निर्णय से पूर्ण सन्तुष्ट की भवना रहती है। सचिव पूर्ण कालिक ने बताया की राष्ट्रीय विधिक सेवा प्रधिकरण में  जन-जन न्याय की इस तीव्र प्रणाली को  पहुचाया है और अदालतों के बोझ बड़े पैमाने तक घटाया है।

सचिव पूर्ण कालिक ने बताया कि  न्यायमूर्ति एन0वी0 रमन्ना, मुख्य न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय ,मुख्य संरक्षक एवं मा0 न्यायमूर्ति यू0यू0ललित,न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय/कार्यपालक अध्यक्ष राष्ट्रीय विधिक सेवा प्रधिकरण (नालसा) के कुशल निर्देशन में विगति एक वर्ष (2021)में राष्ट्रीय लोक अदालतों के माध्यम से सम्पूर्ण भारत में एक करोड़ से अधिक निस्तारण/निपटारा किया गया है।