धोखा दिया प्री मानसून, अब किसान देख रहा आसमान

 धोखा दिया प्री मानसून, अब किसान देख रहा आसमान    



फतेहपुर। मार्च से मई के बीच में होने वाली प्री-मानसून बारिश ने इस साल किसानों को धोखा दिया। इस अवधि में सिर्फ 8.3 मिलीमीटर प्री-मानसून बारिश ही रिकार्ड की गई है, जो कि पिछले आठ सालों में सबसे कम है।    2017 में प्री मानसून के दौरान झमाझम बारिश हुई थी, मौसम विभाग के आंकड़ों में 525.2 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई थी। इस साल से पहले सबसे कम बारिश 2019 में 150 मिलीमीटर रिकार्ड की गई थी।धूलभरी आंधी तो लगभग हर सप्ताह में आई और आसमान में यदाकदा बादल भी आए, लेकिन प्री मानसून बारिश नहीं हो सकी।

इससे किसानों को मायूसी हुई। मौसम विशेषज्ञ का कहना है कि जिले में प्री-मानसून बारिश में 18 प्रतिशत की कमी रही।

इस बार सामान्य से अधिक गर्मी के चलते किसान खरीफ सीजन में खेती की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। जून के पहले सप्ताह में 32 से 35 डिग्री के आसपास तापमान रहना चाहिए, लेकिन इस समय 43 डिग्री के आसपास पारा बना हुआ है।

आठ से 10 डिग्री अधिक तापमान होने के कारण किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी बृजेश सिंह का कहना है कि नर्सरी डालने का सही समय उस वक्त ही होता है जब तापमान 33 डिग्री के आसपास हो।

फिर भी जो किसान धान की नर्सरी डाल रहे हैं, वे छायादार खेत में ही नर्सरी डालें, ताकि सीधी धूप न लगे। नर्सरी की शाम को इतनी हल्की सिंचाई करें कि अगले दिन की सुबह पानी रहने न पाए।

जिले व आसपास क्षेत्र में बारिश न होने की सबसे बड़ी वजह हीट आईलैंड का लगातार बढ़ना है। इसके अलावा सिक्स लेन हाईवे व अन्य निर्माण के दौरान उड़ने वाली धूल, वाहनों और औद्योगिक इकाइयों से उठने वाला धुआं भी कारणों में शामिल है।

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