शिक्षा विभाग का गड़बड़ घोटाला

 शिक्षा विभाग का गड़बड़ घोटाला


फतेहपुर जिले के अंतर्गत खागा तहसील में शिक्षा विभाग आंख मूंदकर


मातहतों से लूट रहा माल

अभिभावक शिक्षक हो रहे बेहाल अनैतिकता से चलाए जा रहे विद्यालय मालामाल हो रहे ठेकेदार

खागा तहसील के अंतर्गत बिना मानक के 50 विद्यालय कार्यरत है इस समय जिनमें इन विद्यालयों के पास विज्ञान वर्ग की मान्यता भी नहीं है लेकिन यहां पर हजारों की संख्या में विज्ञान वर्ग के छात्रों का प्रवेश लिया जाता है वही विद्यालय में चलने वाली बसों की फिटनेस से लेकर उनके ड्राइवरों के पास ड्राइविंग लाइसेंस तक ना होने के बावजूद ब से भर रही फर्राटा खागा के क्षेत्र से सटे हुए बुदवन कटों घन पुरइन त्रिलोचनपुर विजई पुर सुजरही किशनपुर रक्षपालपुर आदि जगहों पर मानक विहीन वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं पुलिस विभाग भी शिक्षा विभाग के साथ काट रहा मलाई कई कई सालों से इन बसों में ना तो नंबर पड़े दिखाई देते हैं और ना ही किसी प्रकार की सुरक्षा के मानक के अनुरूप कोई कार्य हो रहा है लेकिन आश्चर्य का विषय है कि क्षेत्र के एसडीएम जिले की डीएम तथा शिक्षा विभाग के आला अधिकारी कुंभकरण की नींद सो रहे हैं क्या किसी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं क्या किसी मासूम की जान लेने के बाद ही यह जागेंगे इसी प्रकार से जूनियर स्कूलों की बात करें तो बच्चों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं है और सरकार ने इनको विद्यालय चलाने का ठेका दे रखा है विद्यालयों में शिक्षक पात्रता का तो कोई भी मूल्यांकन करने के लिए कभी आया ही नहीं कि इन में हाईस्कूल इंटर आठवीं पास शिक्षक शिक्षिकाएं किस प्रकार से बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं वही दरियापुर से लेकर रक्षपालपुर चौराहे पर विजयपुर चौराहे पर कोचिंग संस्थानों के नाम पर दर्जनों कोचिंग सेंटर खोले गए हैं जिनमें नशेड़ी से लेकर गंजेड़ी तक आप को पढ़ाते मिल जाएंगे क्या शिक्षा विभाग ने कभी इन जगहों का निरीक्षण किया है कदापि नहीं अंधी पीसे कुत्ता खाए वाली कहावत यहां पर लागू होती है आखिर शिक्षा विभाग किस जिम्मेदारी के साथ जिले में शिक्षा का वर्गीकरण करना चाहता है एक तरफ अभिभावक विद्यालयों में भारी-भरकम मोटी फीस दे रहे हैं वह कोचिंग संस्थान उन विद्यालयों के बराबर ही मोटी रकम हड़प कर रहे हैं तो इनका कोई पंजीकरण कराया गया है  क्या इन विद्यालयों में शिक्षा का स्तर इतना गिर चुका है कि विद्यार्थी इधर-उधर कोचिंग संस्थानों पर दौड़ रहे हैं और इन कोचिंग संस्थानों का कोई अपना मानक नहीं है कि कोई देखने को जाता है आखिर यह किसके इशारे पर चल रहे हैं 

बड़े व्यापक स्तर पर विद्यालयों की रूटीन चेकिंग तथा इनके मानक विहीन होने की स्थिति जानने के लिए जिले का क्या कोई अधिकारी दौड़ लगाएगा क्या इन विद्यालयों तक कोई अधिकारी पहुंच जाएगा या फिर मोटी मोटी रकम हजम कर यह शिक्षा विभाग बच्चों के उज्जवल भविष्य के साथ तथा अभिभावकों के आशाओं के साथ खिलवाड़ करता रहेगा।

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