टीबी चैंपियन बने सोहनलाल, अब दूसरों को कर रहे जागरूक
टीबी चैंपियन बने सोहनलाल, अब दूसरों को कर रहे जागरूक

गोष्ठी, और नुक्कड नाटक के जरिये लोगों को करते हैं जागरूक

अब तक 50 टीबी मरीजों की कर चुके हैं मदद 
फतेहपुर। नियमित दवाओं के सेवन और पोषण के जरिये टीबी से ठीक होकर सोहनलाल अब दूसरे टीबी मरीजों के मददगार बन चुके हैं। वह लोगों को टीबी के बारे में जागरूक करने के साथ संभावित मरीजों की जांच भी कराते हैं। टीबी निकलने पर मरीजों को दवा दिलाना और उनकी मदद करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। वह 50 टीबी मरीजों की मदद कर चुके हैं।
खजुहा ब्लाक ब्लॉक के सहजादीपुर गांव के रहने वाले सोहनलाल को वर्ष 2019 में टीबी हुई थी। लगातार खांसी और बुखार आने से वह काफी कमजोर हो गये थे। पहले वह जब वह गुजरात में एक फैक्ट्री में काम करते थे तभी से खांसी की दिक्कत थी।
पहले उन्होंने गुजरात में प्राइवेट इलाज कराया लेकिन आराम न मिलने से फिर वह अपने गृह जनपद चले आये। यहां पर सोहनलाल ने मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नवगांव छावनी जिला छतरपुर मध्य प्रदेश में जाकर इलाज कराया। करीब छह महीने तक दवा खाई और आराम मिलने पर बंद कर दी। एक दिन उन्हे खांसी आई और बलगम के साथ खून आया तो उन्होंने शहर आकर एक प्राइवेट डाक्टर से इलाज कराया। वहां पर डाक्टर ने टीबी की जांच कराई तो पता चला कि उन्हें टीबी है। चिकित्सक ने टीबी अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी। जब सोहनलाल टीबी हास्पिटल पहुंचे तो वहां पर सीबीनाट जांच में एमडीआर ड्रग रेसिस्टेंट टीबी निकली। टीबी हास्पिटल से सोहनलाल को मुरारीलाल चेस्ट हास्पिटल कानपुर के लिये रेफर कर दिया गया। कानपुर के हास्पिटल में पुनः जांच हुई और पांच दिन की दवा देकर उन्हे वापस भेज दिया गया। इसके बाद उन्हे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र बिंदकी से दवा मिलने लगी और सोहनलाल की सेहत में सुधार होने लगा। सोहनलाल को निक्षय पोषण योजना का भी लाभ मिला। करीब तीन वर्ष पहले सोहनलाल पूरी तरह ठीक हो गये और अब टी0बी टीबी चौंपियन बनकर मरीजों को जागरूक कर रहे है। उन्होंने बताया कि बीमारी के दौरान उनकी पत्नी और बच्चों ने पूरा सहयोग किया। कभी एहसास नहीं होने दिया कि वह इतनी गंभीर बीमारी से जूझ रहे है। सोहन लाल ने बताया कि जब टीबी से ठीक हो गये तो उनके मन में दूसरे मरीजों को टीबी के प्रति जागरूक करने की इच्छा जगी। उन्होंने वह टीबी हास्पिटल के एसटीएस अजीत से मिले और अपनी इच्छा बताई और तो उन्हे टीबी चौंपियन बना दिया गया। उसके बाद सोहनलाल गांव गांव विजिट करके लोगों को टीबी के प्रति जागरूक कर रहे हैं और नये मरीज ढूंढ कर इलाज करवा रहे हैं। अब तक उन्होंने 50 मरीजों का टीबी का इलाज कराकर उन्हे ठीक करा चुके है।
टीबी चौंपियन सोहनलाल की मदद से इलाज करा चुके खांडे देवर गांव के रहने वाले 42 वर्षीय पिंटू ने बताया कि उन्हे टीबी थी सोहनलाल से मिलने के बाद एक विश्वास जगा उन्हें ठीक होने में मदद मिली। इलाज के दौरान सोहनलाल उनसे दवा कब और कैसे खाना है, बताते रहे। साथ ही समय समय पर जांच कराने के लिये स्वास्थ्य केंद्र साथ ले जाते थे।

इसी प्रकार सहजादीपुर गांव के रहने वाले 50 वर्षीय लक्ष्मी चंद्र गुप्ता ने बताया कि उन्हें दो वर्ष पहले टीबी हो गई थी। सोहनलाल ने विजिट के दौरान मिलकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराई और दवा दिलाई। कोर्स पूरा करने के बाद अब ठीक हूं। इलाज के दौरान खानपान का कैसे ध्यान रखना है और कौन सी चीजें नहीं खानी है इसकी भी जानकारी देते थे। बलगम टेस्ट और अन्य टेस्ट के लिये भी वह साथ में जाते थे।
इनसेट --
जिले का टी0बी सक्सेस रेट - 88 प्रतिशत
जिले में चिन्हित टी0बी रोगी- 5204
जिले में टीबी का इलाज करा रहे रोगियों की संख्या - 3411
एमडीआर मरीज- 182
निक्षय मित्रों की संख्या- 252
गोद लिये मरीजों की संख्या-1262
सक्रिय टीबी चैम्पियन-12
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बीच में इलाज छोड़ना गलत
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ निशांत शहाबुददीन ने बताया कि ऐसे मरीज जो बीच में इलाज छोड देते हैं तो उन्हें ड्रग रेसिस्टेंट (डीआर) टीबी होने की आशंका ज्यादा होती है। सोहनलाल भी एमडीआर टीबी के मरीज हो गये थे लेकिन धैर्य के साथ पूरा इलाज कराने के बाद ठीक हुये। सोहनलाल के कार्यों की सराहना करते हुये कहा कि अन्य वह टीबी चौंपियन के तौर पर भी गांव गांव विजिट करके लोगों को टीबी के प्रति जागरूक कर रहे है। सकारात्मक बातचीत और पौष्टिक आहार से टीबी से लडाई आसान हो रही है। इसमे टीबी मरीजों को गोद लेकर पोषण व भावनात्मक सहयोग देने वाले इसमें अहम भूमिका निभा रहे है।
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