24 घंटों में सामने आए कोविड-19 के 41,810 नए मामले

24 घंटों में सामने आए कोविड-19 के 41,810 नए मामले


(न्यूज़)।अब तक 136696 की मौत कोरोना के तांडव से देश और दुनिया त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। संक्रमण के दैनिक आंकड़े कम ज्यादा हो रहे हैं लेकिन कोई खास राहत मिलती नहीं दिख रही। बीते 24 घंटों में कोविड-19 के 41,810 नए मामलों के साथ, भारत के कुल मामले 93,92,920 हो गए हैं। वहीं 496 नई मौतों के साथ,मरने वालों की संख्या1,36,696 हो गई हैं। कुल सक्रिय मामले 4,53,956 पर हैं। पिछले 24 घंटे में 42,298 नए डिस्चार्ज के साथ 88,02,267 लोग ठीक हो चुके हैं देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच चिंता की बात यह है कि नये मामलों की तुलना में स्वस्थ लोगों की संख्या में कमी आने से रिकवरी दर में आंशिक गिरावट दर्ज की गई और यह 93.61 फीसदी रह गई है।देश में सक्रिय मामलों की दर 4.90 प्रतिशत जबकि मृत्यु दर भी महज 1.46 फीसदी पर बनी हुई है।कोरोना संक्रमण के मामले में भारत दुनियाभर में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है।अमेरिका में संक्रमितों की कुल संख्या करीब 1.28 करोड हो गई है।भारत हालांकि अमेरिका से अभी भी 38.86 लाख मामले पीछे चल रहा है।


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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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