भक्ति के पथ पर चलने वालों की कठिनाइयां होती है दूर-आचार्य

भक्ति के पथ पर चलने वालों की कठिनाइयां होती है दूर-आचार्य


इस मौके पर नि:शुल्क नेत्र शिविर में नेत्र रोगियो का हुआ परिक्षण


बिंदकी (फतेहपुर)।मलवां विकास खण्ड के शिवराजपुर स्थित दुर्गानगर दुर्गा मंदिर मे आयोजित नव दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान शतचंडी महायज्ञ व श्रीमदभागवत कथा मे तीसरे दिन शुक्रवार को आश्रम स्थल मे निशुल्क नेत्र शिविर लगाया गया।ज्योति संचय नेत्र चिकित्सालय बिन्दकी के चिकित्सको द्वारा यहा नेत्र रोगियो का परिक्षण कर उन्हे परामर्श दिया गया।नेत्र परीक्षक डा.नकुल पटेल व नेत्र सर्जन डा.ए. आर ने आखो की जाच की।बताया कुल 42 मरीज देखे गये है जिनमे 12 मरीज मोतियाबिन्द के लिये चिन्हित किया गया है।आपरेशन के लिये मरीजो को बिन्दकी ले जाया जायेगा जहा उनका इलाज होगा।उधर यज्ञ मे सुबह 7बजे से 2 बजे तक पूजन हुआ।मंत्रो के सस्वर पाठ से आश्रम स्थल गूजता रहा।दोपहर मे शुरु हुई श्रीमदभागवत कथा मे कथा व्यास यदुनाथ अवस्थी ने कहा साधना के पथ पर कठिनाइया आती है परंतु जो जो भी साधक भक्ति के पथ पर जाते है उनके जीवन की सभी कठिनाइया दूर होती है।कथा के पूर्व व्यास पीठ का पूजन आचार्य राजन अवस्थी,आचार्य पंकज तिवारी,देवकान्त,शिवा,मनीष बाजपेई ने कराया।कार्यक्रम के आयोजक स्वामी सत्यांनद जी महाराज,युवा विकास समिति के प्रवक्ता आलोक गौड़ रहे।


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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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