पुलिस ने नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करने वाले अन्तरष्ट्रीय गैंग का किया पर्दाफाश और पांच अभियुक्तों को किया गिरप्तार

पुलिस ने नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करने वाले अन्तरष्ट्रीय गैंग का किया पर्दाफाश और पांच अभियुक्तों को किया गिरप्तार


(न्यूज़)।कानपुर महानगर में तैनात ईमानदार छवि के तेजतर्रार डीआईजी एवं वरिष्ठ एसएसपी डॉ.प्रीतिंदर सिंह के सख्त दिशा-निर्देशन में कानून व्यवस्था व शांति व्यवस्था मजबूत बनाये रखने उद्देश्य से चलाए जा रहे अपराधियों के विरुद्ध धरपकड़ अभियान के अंतर्गत आज जनपद के जूही थाना क्षेत्र में अपराधियों को मुहतोड़ जबाब देने वाले,बड़ी-बड़ी घटनाओ का पूरी ईमानदारी के साथ खुलासा करके पुलिस विभाग का सम्मान बढ़ाने वाले,इस्पेक्टर सन्तोष आर्या ने आज नौकरी लगवाने के नाम पर प्रदेश के विभिन्न जनपदो के बेरोजगार युवकों से लाखों रुपये लेकर फर्जी दस्तावेज बनाने वाले अन्तरष्ट्रीय गिरहों के पांच सक्रिय सदस्यों को साउथ एक्स माल के पास से अभियुक्तों को गिरप्तार करके जेल भेजा है,इन अभियुक्तों की गिरप्तारी के बाद क्षेत्र की  सम्मानित जनता व कानपुर ज़ोन,कानपुर रेंज और कानपुर नगर के वरिष्ठ एसएसपी आदि वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा  इस्पेक्टर सन्तोष आर्या व उनके साथ गिरप्तारी करने वाली पूरी पुलिस टीम की बधाई देकर भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है।


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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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