पूर्व राज्यपाल वोरा को दी गई श्रद्धांजलि।

 पूर्व राज्यपाल वोरा को दी गई

श्रद्धांजलि


कानपुर। उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता मोतीलाल वोरा के निधन पर जीनियस प्रेस एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के चेयरमैन मनोज दीक्षित प्रदेश अध्यक्ष गिरीश खरे प्रदेश प्रभारी डा० के०एम०त्रिपाठी सम्पादक पी०एन०शर्मा वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतुल गुप्ता उपाध्यक्ष अनुपम कुमार शुक्ला प्रदेश महामंत्री कुलदीप सक्सेना प्रदेश सचिव सुरेश चौरसिया एवं कीर्ति कुमार शुक्ला विधि सलाहकार पद्म चन्द्र गुप्ता सम्पादक सहारा टूडे मो0 तारिक सदस्यों सर्वश्री जी0बी0सिंह प्रदीप नागर व जय प्रकाश तिवारी एवं मण्डल अध्यक्ष रमेश कुमार शर्मा दिनेश कुमार अग्रवाल किशन चन्द्र मेहरोत्रा ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि कि मोती लाल वोरा के निधन से कांग्रेस पार्टी को ही नहीं अपितु सम्पूर्ण देश ने एक परिपक्व राजनीतिक समझ वाले नेता को खो दिया है। पदाधिकारियों ने कहा कि श्री वोरा ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन के दौरान अपनी कुशल प्रशासनिक दक्षता से प्रदेश को एक नई दिशा दी थी। श्री वोरा के निधन से कांग्रेस और देश ने एक अच्छा राजनेता खो दिया है जिसकी भरपाई सम्भव नहीं है।

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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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