असोथर नगर पंचायत में कैबिनेट की लगी मुहर, कस्बे में खुशी

 असोथर नगर पंचायत में कैबिनेट की लगी मुहर, कस्बे में खुशी



 फतेहपुर: असोथर ग्राम सभा को एक वर्ष पहले से नगर पंचायत बनाने के चल रहे प्रयास को सोमवार को यूपी कैबिनेट ने अंतिम मुहर लगा कर ग्राम सभा को नगर पंचायत का दर्ज दे दिया। इसकी सूचना जैसे ही जिले पहुंची कटरी क्षेत्र के उन गांवों में खुशी की लहर दौड़ गयी जिन्हें इस नगर पंचायत में शामिल होना है। अब जल्द ही नगर विकास विभाग अंतिम अधिसूचना जारी कर नगर पंचायत का सृजन करेगा।


असोथर को नगर पंचायत बनाने के लिए क्षेत्रीय विधायक विकास गुप्ता एक वर्ष लगाकर प्रयास कर रहे थे। एक वर्ष पहले ही इसे नगर पंचायत बनाने के लिए नगर विकास विभाग लखनऊ ने अनन्तित प्रकाशन जारी कर आपत्तियां प्राप्त कर ली थी। लेकिन इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कैबिनेट की मुहर न लगने के कारण अंतिम प्रकाशन नहीं हो पा रहा था, जिससे हाल ही असोथर को राज्य वित्त की ग्रांट भी दी गयी और परिसीमन में भी कोई परिवर्तन नहीं किया गया। अब इसे नगर पंचायत बनाने पर मुहर लग गयी है तो इस नगर पंचायत में शामिल होने वाले गांवों को शहरी दर्जा मिलेगा। सूचना से क्षेत्र में खुशी की लहर है।

Popular posts
अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
चित्र
तू मेरी गीता पढ़ले मैं पढ़ लू तेरी कुरान, आपस मे भाई चारा निभा के बनायेगे नया हिंदुस्तान
चित्र
पाल सामुदायिक उत्थान समिति की ब्लाक इस्तरीय संगठनात्मक बैठक हुई सम्पन्न
चित्र
कानपुर में ठेले पर पान, चाट और समोसे बेचने वाले 256 लोग निकले करोड़पति
चित्र
योगी सरकार लोगों को देने जा रही फ्री वाईफाई सुविधा
चित्र