पुलिस ने एक दर्जन से अधिक किसानो को शांतिभंग की धारा में पाबंद किया है ठेकेदारो की तरफ किसी को पाबंद नही किया है

 पुलिस ने एक दर्जन से अधिक किसानो को शांतिभंग की धारा में पाबंद किया है ठेकेदारो की तरफ किसी को पाबंद नही किया है


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असोथर(फतेहपुर)।रामनगर कौहन मोरंग खदान R K 1A महादेव कंपनी के ठेकेदार किसानो की एक रास्ता बन गयी थी अब दूसरी रास्ता ठेकेदार किसानो की भूमि से जबरजस्ती बना रहे है 22 किसानो की गाटा संख्या 1636 , 1668 ,1590 , 1685 , मुस्तकिल के है |और 69 , 70 ,71, 72, 73 ऐहतमाली से बगैर सहमति के रास्ता बना रहे है तहसील दिवस में लालताप्रसाद, कमलारानी , देवमणि ,भोली राकेस दुबे , दुॅगा ,जगदीस ,गोमती देवी , देवरती, नंदकिसोर ,कल्लू , बडकवा ,ममता देवी बेवा व राजकरण सिंह , शिवकरण सिंह ,मानसिंह ज्ञान सिंह मुन्नी देवी को धमकी देकर रास्ता बना रहे है |

शिकायत के आधार पर नायब तहसीलदार संतराज ,कानूनगो भानचंद्र , व तीन अन्य कानूनगो ,लेखपाल कौशल यादव की टीम मौके पर नजरी मुआयना किया तनाव की वजह से थानाध्यक्ष असोथर रणजीतबहादुर सिंह फोसॅ के साथ रहे विवादित भूखंडो के मिल जुमला गाटो से रास्ता न बनाने पर किसान अडे रहे प्रसासन किसी नतीजे पर नही पहॅचा सुक्रवार को किसान उपजिलाधिकारी सदर से मिलकर ठेकेदारो की जास्ती रोकने की गुहार लगायेगे।

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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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