ट्रैक्टरों का कृषि कार्य के लिएं रजिस्ट्रेशन , और ढ़ो रहें ओवरलोड़ मौरंग

 ट्रैक्टरों का कृषि कार्य के लिएं रजिस्ट्रेशन , और ढ़ो रहें ओवरलोड़ मौरंग




फतेहपुर। जनपद में इन दिनों  ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का हो रहा नियम विरुद्ध उपयोग, परिवहन विभाग को हो रहा नुकसान

परिवहन विभाग ने कृषि कार्य में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर-ट्रालियों को टैक्स मुक्त रखा है। 

किसानों की आड़ में हजारों ट्रैक्टर-ट्रॉली मालिक कृषि कार्य के नाम से इनका पंजीयन कराकर ओवरलोड़ मौरंग ढुलाई व अन्य व्यवसायिक कार्य कर रहे हैं। इससे परिवहन विभाग को हर महीनें लाखों रुपए का परिवहन टैक्स के रुप में राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि खेती को फायदे का धंधा बनाने के लिए शासन किसानों को सुविधा प्रदान करते हुए कृषि कार्य में उपयोग होने वाले संसाधनों व यंत्रों पर लाखों रुपए का अनुदान देता है।

एक ओर किसान संगठन मौजूदा मोदी सरकार के नएं कृषि कानूनों पर बदलाव की मांग के लिए देश की राजधानी दिल्ली में लगातार पिछले 37 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं ।

वहीं जनपद फतेहपुर में हजारों व्यवसायी किसानों की आड़ में शासन से अनुदान प्राप्त कर ट्रैक्टर-ट्राली खरीदकर उसका पंजीयन कराकर वाहन का उपयोग मौरंग, गिट्टी, ईंट, बजरी, मिट्टी ढुलाई सहित अन्य व्यवसायिक कार्यों में करते चले आ रहे हैं, जिससे शासन को तो चूना लग ही रहा है, साथ ही आए दिन हादसे भी हो रहे हैं। 

बावजूद इसके न केवल जनपद मौरंग खदानों में व्यापारियों द्वारा खुले आमआम ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का व्यवसायिक उपयेाग हो रहा है।

लगभग दुगुनी हो जाती है फीस

बताया गया है कि कृषि कार्य के लिए जब कोई किसान अपने वाहन का पंजीयन कराता है तो उसे आधे ही रुपए देने पड़ते हैं। यदि टैक्टर - ट्राला का उपयोग कमर्शियल कार्य के लिए किया जाता है तो उसका पंजीयन शुल्क 5000 रुपए के अतिरिक्त एक प्रतिशत परिवहन के नाम पर वसूला जाता हैं। विश्वत सूत्रों की मानें तो अब तक फतेहपुर जिले में एक भी ट्रैक्टर-ट्राली का पंजीयन मौरंग ढुलाई आदि कमर्शियल उपयोग के लिए नहीं किया गया है, जबकि 90 प्रतिशत से अधिक व्यवसायिक कार्य में लगे हुए हैं।


*ट्रक के बराबर है ट्रॉली*


पूर्व में ट्रैक्टर की ट्रॉली पांच गुणा आठ फीट लंबाई-चौड़ाई तथा डेढ़ फीट ऊंचाई की बनाई जाती थी। जबकि, वर्तमान में असोथर क्षेत्र की रामनगर कौहन मौरंग खदान से दिन - रात अनवरत निकल रही ट्रैक्टर - ट्रॉलियां ट्रक के आकार से कम नजर नहीं आती हैं। 

इनमें ट्रक जितना ही 10-12 टन मौरंग लादा जाता है।

अभी हमने वाहन चेकिंग अभियान चलाया है, लेकिन जल्द ही केवल ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की चेकिंग को कार्यवाही करेंगे और व्यवसायिक उपयोग में आने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की धरपकड़ कर उनसे परिवहन शुल्क वसूला जाएगा।