गर्भाशय में भी हो सकता है टीबी: डॉ गुप्ता

 गर्भाशय में भी हो सकता है टीबी: डॉ गुप्ता



 जिले में जांच व इलाज की है समुचित व्यवस्था


17.4 % महिलाओं के प्रजनन अंगों में हो जाती है टीबी  


फतेहपुर।अमिताभ बच्चन का वह विज्ञापन याद है न ?  जिसमें अमिताभ कहते हैं की तीन हफ्तों से ज्यादा खांसी आ रही है तो टीबी की जांच अवश्य कराएं। टीबी बोले तो ट्यूबरक्लोसिस। ये शब्द सुना तो बहुत बार होगा दिमाग में इस बीमारी की एक तस्वीर भी है वही बीमारी जिसमें खांस-खांसकर जान चली जाती है।           टीबी एक बैक्टीरियल संक्रमण है जो फेफड़ों के साथ कहीं भी हो  सकती है।  यह कहना है जिला अस्पताल के वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ पी0के0 गुप्ता का। 

डॉ गुप्ता टीबी आपके प्रजनन करने बाले अंग में भी हो सकता है यानी वो सारे अंग जो बच्चा पैदा करने में आपकी मदद करते हैं। 

        जिला महिला चिकित्सालय में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ पी0के0 गुप्ता का कहना है कि ‘इस तरह के टीबी को पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस कहते हैं। इस तरह का टीबी महिलाओं के प्रजनन अंग में होता है जैसे  कि आपके गर्भाशय और उससे जुड़े फैलोपियन ट्यूब में भी यह रोग हो सकता है। डॉ गुप्ता ने कहा कि माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस ये एक तरह के जीवाणु होते हैं यही सारी मुसीबत की जड़ हैं मतलब शरीर में इनकी एंट्री और टीबी की शुरुआत, अगर शरीर के किसी और हिस्से में ये बैक्टीरिया घर कर जाए तो ये आपके  प्रजनन अंग तक पहुंच सकते हैं।

          डॉ गुप्ता कहते हैं कि शुरू में में यह पकड़ में आना थोड़ा मुश्किल होता है। कई लोग इसे कैंसर भी समझ लेते हैं, पर ये कैंसर नहीं है ये तब सामने आता है जब औरत चाहकर भी मां नहीं बन पा रही होती। इसके कुछ लक्षण थकान, हल्का बुखार, पेट के निचले हिस्से में दर्द रहना, वजाइना से सफेद पानी निकलना, पीरियड्स ठीक समय पर न होना होते हैं। साथ ही कहा कि इसके बारे में जानने के लिए एक टेस्ट होता है, इसे कहते हैं ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्टद्य ये शरीर में किसी भी हिस्से में होने वाले टीबी के बारे में पता लगा लेता है। आपके पेट के निचले हिस्से का अल्ट्रासाउंड भी इस बीमारी का पता लगा सकता है इसलिए जरूरी है कि अगर आपको बताए गए सारे लक्षण महसूस हो रहे हैं तो डॉक्टर से मिलिए। साथ ही कहा कि पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस का इलाज इस पर निर्भर करता है कि कंडीशन कितनी सीरियस है, दवाइयों से लेकर सर्जरी तक की जा सकती है। साथ ही कहा की पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस को प्रजनन अंग तक आने से रोकने का तरीका है, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि शरीर के किसी और हिस्से में टीबी तो नहीं है। वरना उसके फैलने की संभावना अधिक हैं क्योंकि टीबी फैलने वाली बीमारी है, इसलिए जरूरी है कि आप उन लोगों से थोड़ा दूर रहें जिन्हें टीबी है दूरी का मतलब उनका जूठा खाना न खाएं वो खांसे या छींके तो दूरी बना लें।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ एस0पी0 जौहरी ने बताया कि जिले में टीबी रोग के इलाज की समुचित व्यवस्था है। जांच के साथ दवाओं के भी पर्याप्त इंतजाम है। साथ ही कहा कि लगभग 17.4 प्रतिशत महिलाओं के प्रजनन अंगों में टीबी हो जाती है  यह महिलाओं के फैलोपियन ट्यूब में लगभग 90 से 100 प्रतिशत, गर्भाशय में 50 से 60 प्रतिशत और ओवरी में 20 से 30 प्रतिशत तक टीबी हो सकती है।

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