कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के द्वारा किया गया मेले का शुभारंभ

 कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के द्वारा किया गया मेले का शुभारंभ 



दीप प्रज्वलित कर व फीता काटकर किया मेले  की शुरुआत  हजारों की संख्या में पहुंच रहे किसान 


बाँदा संवाददाता। तीन दिवसीय किसान मेले का आयोजन उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दीप प्रज्वलित कर व फीता काटकर किया मेले का शुभारंभ वहीं साथ में चित्रकूट बांदा के सांसद आरके पटेल सहित कृषि वैज्ञानिक व विशेषज्ञ मौजूद व हजारों की संख्या में किसान मेले में शामिल किसान की उन्नति व प्रगति को लेकर किया गया किसान मेले का आयोजन बिहार पंजाब जम्मू उत्तराखंड 7 राज्यों के किसान हो रहे शामिल दी जा रही है नई-नई तकनीकों के बारे में जानकारी निराई गुड़ाई बुवाई सिंचाई कैसे बीज का चयन करें किस टाइम में खेत की जुताई करें किस टाइम में बुवाई करें हर चीज की को वैज्ञानिक तरीके से वैज्ञानिकों के द्वारा दी जा रही है जानकारी वहीं किसान मेले में लगे स्टालों के माध्यम से हर जगह के इंटर वालों के माध्यम से ले रहे हैं जानकारी वहीं किसानों को ड्रोन कैमरे के माध्यम से भी कीटनाशक छिड़काव की भी जानकारी दी जा रही है व बागवानी पशुपालन मत्स्य पालन आदि विषयों में जानकारी दी जा रही है वही किसानों की आय दोगुनी करने के लिए भी उनको तरह-तरह के उपाय बताए जा रहे हैं ।अच्छी खेती व लागत व्यय कम करने के अचूक नुस्खे फसलों की बुवाई के पूर्व अपने खेत में मेड़ों की मरम्मत का कार्य अवश्य करें, खेत को समतल करें, भूमि की भौतिक दशा में सुधार करें, गर्मी में खाली खेतों की गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से अवश्य करें तथा क्षारीय भूमि सुधार हेतु जिप्सम का प्रयोग करें।

वर्षा जल के संरक्षण एवं भू-क्षरण रोकने हेतु खेत की मेड़ मजबूत एवं ऊँची रखें। पहली एवं लम्बे अंतराल पर हुई वर्षा में जल के साथ वायुमंडलीय नत्रजन घुला होने के कारण भूमि की उर्वरा क्षमता में वृद्धि होती है।

अधिक जलभराव की दशा में जल निकास का उचित प्रबन्धन करके फसलों को बचाये ।

14 मृदा परीक्षण के आधार पर संस्तुत मात्रा में खाद, उर्वरक एवं सूक्ष्म तत्वों का प्रयोग करें । उर्वरकों को सदैव कूड़ों में 10-15 सेमी. गहराई पर प्रयोग करें।

पूंजी, श्रम एवं खेत की दशा के आधार पर फसलों का चुनाव करें, भूमि का सदुपयोग करके लागत व्यय को कम करें।बीज प्रतिस्थापन दर को बढ़ावा दें, अधिक उपजाऊ, बेहतर गुणवत्ता वाली, जलवायु के प्रति संवेदनशील, अधिक अनुकूलता, विपरीत दशाओं के प्रतिरोधिता व सही समय पर परिपक्वता वाली प्रजातियों का चुनाव, बाजार मांग को देखते हुए करें।

फसलों को बोने के लिए उचित बीज दर रखें तथा बीजोपचार के बाद ही बीजों को बोयें।

यथासंभव आधारीय या प्रमाणित बीज का प्रयोग संस्तुत मात्रा में करें। यदि घर के बीज का प्रयोग बुआई हेतु किया जा रहा है तो बीज का उपचार फंफूदनाशक रसायन या बायो-पेस्टीसाइड्स से

अवश्य करें।

समय से फसल उगाने के लिए खेत की तैयारी करें, समय से फसलों को बोयें । फसलों को हमेशा लाइन से उचित दूरी पर सही समय पर, उचित मात्रा में खादों व उर्वरक के साथ बोयें। फसलों में बायो खाद व कार्बनिक खादों का उपयोग करें तथा फसलों की सुरक्षा के लिए बायो कारकों का उपयोग करें। खरपतवार, कीट एवं व्याधियों से बचाव के लिए फसल चक्र अपनायें।

धान-गेहूँ फसल चक्र वाले क्षेत्रों में मृदा उर्वरता को बनाये रखने के लिए हरी खाद हेतु द्वैचां, सनई की बुआई अवश्य करें।मृदा स्वास्थ्य में सुधार हेतु कार्बनिक खाद जैसे- कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, नॉडेप कम्पोस्ट, प्रेसमड आदि का प्रयोग करें।

फसलों की सिंचाई पलेवा विधि से न करें, बल्कि सिंचाई की उन्नत विधियों जैसे- क्यारी, थाला, बार्डर, HE TELANGA

चेक बेसिन, बरहा स्प्रिंकलर, ड्रिप सिंचाई विधि आदि का प्रयोग करें।अधिक आमदनी प्राप्त करने हेतु फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, बागवानी, सब्जी उत्पादन,फूल उत्पादन, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन आदि कार्यक्रमों को भी अपनायें।

खेत में धान के पुआल, गेहूँ के डंठल आदि को न जला बल्कि डिस्क हैरो या मिट्टी पलटने वाले हल AHABAD

से खेत में पलटकर दबायें व सड़ायें।

कम अवधि की नगदी फसलें जैसे- आलू, तोरिया, मशरूम, उर्द, मूंग, लोबिया, ग्वार आदि फसलों की 2.1910 खेती प्राथमिकता के आधार पर करें।

अधिक उत्पादन प्राप्त करने हेतु एकीकृत पौध पोशण प्रबन्धन एवं एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन तकनीक को अपनायें और

कम लागत में गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त करने हेतु जैव उर्वरक, बायो-पेस्टीसाइड्स, जैविक खादों का प्रयोग करें एवं फसल चक्र में दलहनी फसल का समावेश अवश्य करें।

समय के अभाव को देखते हुए खेती में मशीनों का उपयोग अधिक से अधिक करें।

प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए सहफसली पद्धति अपनायें।सही समय पर (निराई-गुड़ाई, सिंचाई, कीट प्रबन्धन, फसलों की कटाई, मड़ाई एवं विपणन आदि)

कृषि कार्य करें। आज विषयों में वैज्ञानिक तकनीक से दी जा रही है किसानों को जानकारी किसान भी इस मेले के आयोजन से काफी खुश हैं भारी मात्रा में किसान मौजूद रहे।

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