भारत में बीते 24 घंटों में आए कोरोना संक्रमण के 38 हजार नए मामले, 560 मरीजों की हुई मौत

 भारत में बीते 24 घंटों में आए कोरोना संक्रमण के 38 हजार नए मामले, 560 मरीजों की हुई मौत



न्यूज़।देश में कोरोना के मामलों में उतार-चढ़ान जारी है। बीते 24 घंटों की बात करें तो देश में कोरोना संक्रमण के 38 हजार नए मामले सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 38,079 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान देश भर में कोरोना संक्रमण के कारण 560 लोगों की मौत हुई है। इस समय देश में कोरोना के चार लाख 24 हजार सक्रिय मामले हैं, जबकि रिकवरी रेट बढ़कर 97.31 फीसद हो गया है।बता दें कि देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर की रफ्तार अभी पूरी तरह थमी नहीं है। तीसरी लहर की आशंका के बीच संक्रमण के दैनिक मामलों में उतार-चढ़ाव जारी है। केरल और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में एक बार फिर कोरोना का कहर शुरू हो गया है। गौरतलब है कि हाल के महीनों में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या अधिक होने के बावजूद, भारत में दूसरी कोविड लहर में मृत्यु दर पहले की तुलना में कम बनी हुई है। हालांकि, दूसरी लहर की मृत्यु दर अभी भी बढ़ रही है क्योंकि कई राज्यों से मौतों की संख्या और बैकलॉग मौतों को जोड़ना जारी है।

Popular posts
अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
चित्र
तू मेरी गीता पढ़ले मैं पढ़ लू तेरी कुरान, आपस मे भाई चारा निभा के बनायेगे नया हिंदुस्तान
चित्र
पाल सामुदायिक उत्थान समिति की ब्लाक इस्तरीय संगठनात्मक बैठक हुई सम्पन्न
चित्र
कानपुर में ठेले पर पान, चाट और समोसे बेचने वाले 256 लोग निकले करोड़पति
चित्र
योगी सरकार लोगों को देने जा रही फ्री वाईफाई सुविधा
चित्र