अभी तक पत्रकार पर हमला करने वाले अभियुक्तों की नही हुई गिरफ्तारी

 अभी तक पत्रकार पर हमला करने वाले अभियुक्तों की नही हुई गिरफ्तारी



ज्वालागंज चौराहे पर मंगलवार की रात हुआ था सुनियोजित हमला


फतेहपुर। कोतवाली से पांच सौ मीटर दूर मंगलवार की रात पत्रकार पर जानलेवा हमला हुआ। पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को नामजद करते हुए ग्यारह अज्ञात पर लिखापढ़ी तो कर ली लेकिन अभी तक एक भी हमलावर नहीं पकड़ा जा सका है। पुलिस की लचरता केे कारण हमलावर धमकियां दे रहे हैं। पुलिस ने घटना वाली रात जिन दो लोगों को बलवा वाले स्थान से हिरासत में लिया था, उन पर 151 की सिर्फ कार्रवाई करके छोड़ दिया गया।

इलाहाबाद से प्रकाशित हिन्दी दैनिक के जिला संवाददाता रईस उद्दीन पर यह हमला हुआ था। वह रोज की तरह अखबार के दफ्तर का काम निपटा कर रात दस बजे न्यू कालोनी ज्वालागंज लौट रहे थेे। ज्वालागंज चौराहे पर इन पर जानलेवा हमला हुआ। वह जान बचाकर घर की ओर भागे। हमलावरों ने उन्हें पकड़कर लाठी-डण्डा व लोहे की राड से जमकर मारापीटा। जिसमें वह गम्भीर रूप से घायल हो गये। इस मामले में पीड़ित की तरफ से इश्तेयाक, अबरार, बिट्टू व रिफाक समेत ग्यारह अज्ञात पर मुकदमा दर्ज कराया था। चार दिन का वक्त गुजरने के बावजूद अभी तक पुलिस इस घटना में हाथ मल रही है। हमलावर लगातार मामले में सुलह करने की धमकी दे रहे हैं। इस मामले में जिस तरह पुलिस हीलाहवाली बरत रही है उससे हमलावरों के हौसले बुलन्द हैं। यदि पुलिस का यही रवैया रहा तो निश्चित तौर पर पत्रकार पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ आवाज उठायेंगे।

Popular posts
अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
चित्र
तू मेरी गीता पढ़ले मैं पढ़ लू तेरी कुरान, आपस मे भाई चारा निभा के बनायेगे नया हिंदुस्तान
चित्र
पाल सामुदायिक उत्थान समिति की ब्लाक इस्तरीय संगठनात्मक बैठक हुई सम्पन्न
चित्र
कानपुर में ठेले पर पान, चाट और समोसे बेचने वाले 256 लोग निकले करोड़पति
चित्र
योगी सरकार लोगों को देने जा रही फ्री वाईफाई सुविधा
चित्र