सुप्रसिद्ध साहित्यकार और पूर्व आइएएस अफसर डा भगवती शरण मिश्र का निधन

 सुप्रसिद्ध साहित्यकार और पूर्व आइएएस अफसर डा भगवती शरण मिश्र का निधन 



न्यूज़। प्रसिद्ध साहित्यकार और भारतीय प्रशासनिक सेवा से अवकाश प्राप्त अधिकारी डा भगवती शरण मिश्र नहीं रहे। शुक्रवार सुबह नई दिल्ली में उनका निधन हो गया। वे रोहतास जिले के संझौली प्रखंड के बेनसागर गांव के रहने वाले थे। डा भगवती ने 100 से भी ज्यादा पुस्तकें और ग्रंथ लिखे हैं। हिंदी, इंग्लिश, बांग्ला और मैथिली के विद्वान भगवती शरण मिश्र बिहार सरकार के राजभाषा विभाग के राजभाषा निदेशक थे और वे रेलवे मंत्रालय में भी अधिकारी रहे।

डा भगवती शरण मिश्र ने हिंदी, भोजपुरी, मैथिली ग्रंथ अकादमी के प्रमुख का भी पद संभाला है। 81 वर्षीय मिश्र अपने पीछे एक भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी बेटियां डा आशा मिश्रा उपाध्याय, ऊषा मिश्रा और छाया मिश्रा हैं। पिछले वर्ष (अप्रैल, 2020) में ही उनकी धर्मपत्नी कौशल्या देवी का निधन हो गया था। परिजनों ने बताया कि शुक्रवार को दिल्ली में उनका अंतिम हुआ। बेटे दुर्गा शरण मिश्र ने उन्हें मुखाग्नि दी।

डा भगवती संस्कृत के धुरंधर धर्मप्राण पण्डित यदुनंदन मिश्र के पौत्र और संस्कृत एवम हिंदी के सुप्रतिष्ठित विद्वान पण्डित गजानन मिश्र के सुपुत्र थे। पिता के कठोर अनुशासन और उनकी आज्ञा का पालन करते हुए उन्होंने अर्थशास्त्र को अपने अध्ययन का विषय चुना। फिर म्यूनिसिपल टैक्सेसन इन ए डेवलपिंग इकोनॉमी विषय पर बिहार विश्वविद्यालय मुज़फ्फरपुर  से पीएचडी की। बाद में वे मुजफ्फरपुर में ही नगर निगम के आयुक्त के पद पर पदस्थापित भी हुए।

कई ऐतिहासिक और पौराणिक उपन्‍यास लिखे

डा भगवती संस्कृत, हिंदी, बंगला, अंग्रेजी के अलावा शाहाबादी भोजपुरी भी लिखते-बोलते थे। कादम्बिनी मासिक के वे स्थायी लेखकों में सूचीबद्ध थे। उपन्यास लेखन की विधा में तो ऐतिहासिक और पौराणिक पात्रों के माध्यम से समाज के अप सांस्कृतिक मूल्यों के परिष्कार हेतु आदर्श चरित्रों की स्थापना की। छत्रपति शिवाजी के जीवन पर 'पहला सूरज', भक्ति के सेवा मार्ग के अनुयायी हनुमान के जीवन चरित्र पर 'पवन पुत्र', श्री कृष्ण के संपूर्ण जीवन चरित्र पर 'प्रथम पुरुष', एवं राम के चरित की नई व्याख्या करते हुए 'पुरुषोत्तम' तथा सगुण भक्ति की साधिका मीरा बाई के जीवन चरित्र पर 'पीताम्बरा' महाकाव्य लिखा। डा भगवती की उपन्यास लेखन की शैली महान उपन्यासकार अमृत लाल नागर के शिल्प को छूती हुई प्रतीत होती है।

कई हस्‍तियों ने दुख जताया

डा भगवती के निधन पर सांसद गोपाल नारायण सिंह, छेदी पासवान, महाबली सिंह, करगहर विधायक संतोष मिश्रा, पूर्व विधायक जवाहर प्रसाद, संजय पाठक, डॉक्टर गिरीश नारायण मिश्र, रमेश चौबे, राजेश्वर राज और बलराम मिश्र ने शोक संवेदना प्रकट किया है। सभी ने संवेदना जताते हुए कहा कि साहित्य जगत को हुए नुकसान की भरपाई संभव नहीं है।

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