राजनाथ सिंह और नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, अफवाहों के विपरीत कृषि कानून लागू होने के बाद लगातार बढ़ाई गई MSP

 राजनाथ सिंह और नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, अफवाहों के विपरीत कृषि कानून लागू होने के बाद लगातार बढ़ाई गई MSP



तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले करीब 10 महीने से जारी किसानों के आंदोलन के बीच केंद्र सरकार की ओर से अहम फैसला लिया गया। मोदी सरकार ने बुधवार को रबी की फसल की एमएसपी (न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य) में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है


केंद्रीय रक्षा मंत्री और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर


 न्यूज़। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले करीब 10 महीने से जारी किसानों के आंदोलन के बीच केंद्र सरकार की ओर से अहम फैसला लिया गया। मोदी सरकार ने बुधवार को रबी की फसल की एमएसपी (न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य) में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। सरकार रोज नई-नई घोषणाओं से उन्हें यह भरोसा दिला रही है कि किसानों के हितों के साथ समझौता नहीं होगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में आज गेहूं समेत रबी की कई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 40 रुपये से लेकर 400 रुपये तक की वृद्धि की गई है। यह निर्णय प्रमाण है कि एमएसपी की व्यवस्था पर कोई आंच नहीं आने वाली बल्कि उसमें वृद्धि भी जारी रहेगी। उन्‍होंने कहा कि कृषि और किसान के कल्याण के प्रति प्रधानमंत्री मोदीजी की प्रतिबद्धता पूरी तरह स्पष्ट है। रबी की फसलों का एमएसपी बढ़ाने का आज का निर्णय, किसानों की आमदनी में वृद्धि करेगा। इस कल्याणकारी निर्णय के लिए मैं प्रधानमंत्रीजी को बधाई और हार्दिक धन्यवाद देता हूं।

इसे बारे में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर कि कुछ लोग यह गलत सूचना फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि एमएसपी बंद कर दिया जाएगा। इसके विपरीत कृषि कानूनों के लागू होने के बाद एमएसपी पर फसलों की खरीद और एमएसपी की दर लगातार बढ़ रही है।

दिल्ली में टीएमए की वार्षिक बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कि हमारे देश में 80 फीसद छोटे किसान हैं जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि छोटा किसान भी अपना उपकरण खरीद पाए। उन्‍होंने कहा कि लॉकडाउन के बाद भी कृषि पैदावार और उपार्जन बढ़ रहा है। अर्थव्यवस्था में योगदान, जीडीपी में हिस्सा बढ़ रहा है। कृषि क्षेत्र में काम करने वाले उद्योगों ने अपना कामकाज ही नहीं किया बल्कि अधिक बिक्री करके देश के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करने में सफलता प्राप्त की। यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि हमने कृषि की प्रधानता को स्वीकार किया। इस क्षेत्र को लॉकडाउन की अवधि में भी खोला और जो सुविधाएं प्रदान की जा सकती थीं वो प्रदान की।

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