कार्तिक पूर्णिमा का दो दिवसीय मेंला सम्पन्न

 कार्तिक पूर्णिमा का दो दिवसीय मेंला सम्पन्न



न मंदिर न पुजारी लटेश्वर धाम में जुटते हैं हजारों श्रृद्धालु


गिरिराज शुक्ला


बिंदकी फतेहपुर।जनपद फतेहपुर के ऐतिहासिक धार्मिक कस्बा बकेवर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बटेश्वर धाम में लगने वाला मेला सकुशल संपन्न हो गया ।मेले में हजारों पुरुष व महिलाएं उनके प्रतीक रूप शिवलिंग जिन्हें जोड़ी कहा जाता है चढ़ाकर अपनी मनौती मानते हैं। कस्बा बकेवर से जुड़ी ग्राम सभा सराय बकेवर के शिवपाल ने अपनी मनौती के तहत बाबा लटेश्वर धाम में नृत्यांगनाओं का नृत्य करा कर सामूहिक भोज कराया ।इस मौके पर हजारों की संख्या में महिलाओं व पुरुषों ने देवाधिदेव भगवान लटेश्ववर के दर्शन कर उनसे सुख समृद्धि की कामना के यूं तो किंवदंतियों और मान्यताओं के मुताबिक बाबा लटेश्वर सभी लोगों को मनवांछित फल प्रदान करते हैं ।वही संतानों को संतान सुख की प्राप्ति करवाते हैं ।अब तक हजारों लोगों को संतान सुख की प्राप्ति हो चुकी है। जो इस धार्मिक स्थल पर आकर अपनी मनौती मानते हैं और मनौती पूर्ण हो जाने के बाद आकर अपने बच्चों सहित धार्मिक अनुष्ठान कर बाबा की कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं।यहां के 111, वर्षीय सूरज प्रसाद तिवारी व अन्य बुजुर्ग ग्रामीणों का कहना है कि लटेश्वर बाबा की कृपा से ही अंग्रेजों के शासनकाल में उनकी क्रूरता से कस्बे को बचाया जा सका था। उन्होंने बताया है कि जब अंग्रेजी फौज यहां आअई तो जैसे ही गांव में घुसने लगी उनकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया और मजबूर होकर उन्हें वापस जाना पड़ा। इसी तरह अनेक लोगों को कोर्ट के मामलों में भी विजय मिली और वे भगवान लटेश्वर के मुरीद हो गए ।इस अवसर पर यहां एक-दो दिन का कार्तिक पूर्णिमा और पौष कृष्णा प्रथम  के दिन लगने वाले मेले में मिट्टी के शिल्पकार उनकी प्रतिमूर्ति शिवलिंग जोड़ी छोटे और बड़े जोडी आकारों में गढ़ कर लाते हैं और श्रद्धालु उन्हें खरीद कर भगवान लटेश्वर को अर्पित करके आशीर्वाद लेते हैं ।सबसे खास बात कि इस स्थान पर न तो कोई मूर्ति है ना ही कोई मंदिर है ।सिर्फ एक स्थान पर प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में बाबा मटेश्वर की प्रतिमूर्ति शिवलिंग चढ़ाए जाते हैं वहीं इकट्ठा होते रहते हैं ।सबसे खास बात एक और भी है कि यहां प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में मिट्टी के शिवलिंग चढ़ाए जाते हैं। किंतु वहां इतनी ही संख्या में शिवलिंग दिखाई पड़ते हैं जितने प्रतिवर्ष चढ़ाए जाते हैं। इसी कस्बे में संत शिरोमणि स्वामी पथिक जी महाराज का भी जन्म हुआ है और इस ग्राम की अस्मिता का प्रतीक चिन्ह बटेश्वर धाम भी है।

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