बलिदान दिवस पर बलिदानियों को नमन

 बलिदान दिवस पर बलिदानियों को नमन



बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बलिदानियों को अर्पित की श्रद्धा सुमन


बलिदान दिवस पर स्वयंसेवकों ने लिया बुंदेलखंड राज्य निर्माण का संकल्प 


खागा (फतेहपुर)। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक ठा. दरियाव सिंह की स्मारक पर बुंदेलखंड राष्ट्र समिति राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय ने साथियों के साथ पहुंच बलिदानियों को नमन किया | बताया कि सीमित संसाधन व बेहद न्यून सैन्य शक्ति के दम पर फिरंगियों से लोहा लेने वाले अमर शहीद को अंग्रेजों ने छह मार्च 1858 को उनके छह अन्य साथियों के साथ फांसी पर लटका दिया। कस्बे के गढ़ी मुहल्ला स्थित अमर शहीद की कोठी ब्रितानी हुकुमत के जुल्मों की दास्तां बयां कर रही है।

केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय ने 165वें बलिदान दिवस के अवसर पर अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए बताया कि फतेहपुर कचहरी में 10 जून 1857 को क्रांतिकारी साथियों के साथ अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह ने आक्रमण किया। यहां अंग्रेजी सेना से भीषण संग्राम के बाद जिला मुख्यालय पर कब्जा कर स्वतंत्रता का परचम लहराया गया। समूचे जनपद को पूर्ण स्वतंत्र घोषित किया गया। ठा. दरियाव सिंह के पुत्र ठा. सुजान सिंह ने 32 दिनों तक स्वतंत्र सरकार चलाई। इस स्वतंत्र सरकार में डिप्टी कलेक्टर रहे हिकमतउल्ला खां को चकलेदार बनाया गया था। 11 जुलाई 1857 को अंग्रेजों ने मेजर रिनार्ड को फतेहपुर में कब्जा करने भेजा था। खागा में अंग्रेजी सैनिकों को युद्ध में मुंह की खानी पड़ी। और क्रांतिकारियों के जुनून के आगे उन्हें भागना पड़ा। 11 जुलाई की रात में मेजर रिनार्ड ने खागा में आक्रमण कर दिया। ठा. दरियाव सिंह के मजबूत महल को तोपो से उड़ा दिया गया। बिलंदा, औंग, बांदा जनपद के पहाड़ी तथा चित्रकूट जनपद के हनुमान धारा में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों से कई युद्ध लड़े। नौ महीने तक ठा. दरियाव सिंह तथा उनके क्रांतिकारी साथियों ने अंग्रेजों से अलग-अलग जगहों पर युद्ध किए। ठा. दरियाव सिंह सहित ठा. सुजान सिंह, निर्मल सिंह, बख्तावर सिंह, तुरंग सिंह तथा रघुनाथ सिंह को अंग्रेजों ने पकड़ लिया। सभी को 6 मार्च 1858 को जिला जेल में एक साथ फांसी दे दी गई।मुख्यरूप से इस अवसर पर नास्त्रोदमस त्रिपाठी , राज , संतोष गुप्ता , धीरज , अर्पित  ,ऋषि केसरी आदि स्वयंसेवक साथ रहे।