रिश्वत नहीं तो काम नहीं

 रिश्वत नहीं तो काम नहीं



घराऊनी व पैमाईश के नाम पर लेखपाल ने मांगी रिश्वत

 

आडियों और बीडयों ने खोली पोल,कैमरें में कैद लाईव रिश्वत लेते खागा का लेखपाल

    


फतेहपुर। जिले खागा तहसील के चकिया मजरे बराहटा गांव में जमीन की पैमाइस के लिए एक लंबे समय से यहां के किसान बराहटा के निवासी   लेखपाल के चक्कर लगा रहे थे।पीडित किसान की अगर मानी जाय तो उनका कहना है कि हम लोगो से पैमाइस के नाम पर लेखपाल ने पैसा पन्द्रह हजार की मांग रहा था और पैसै की बगैर कोई काम नही करता है, और पैसे न मिलने पर गलत रिपोर्ट लगा कर शासन में भेज देते है।और अपने उच्चाधिकारियों को गुमराह व शासन को गलत रिपोर्ट प्रेषित कर देते है हम लोगो ने अपने हाथों से लेखपालो को पैसा दिया ।ग्रामीण किसान ने बताया कि हमसे भी पैसा  लेखपाल पैसा माग रहा था  हमने हार मानकर लेखपाल के हाथों में  पैसा दिया,वही पीड़ित किसान ने बताया कि पैमाइस के नाम पर पहले हमसे पन्द्रह हजार रुपए मांगा धीरे धीरे आखिर कार हार कर पन्द्रह हज़ार रुपए हमको देना ही पड़ा जो हमसे स्वयं के हाथों देना पडा ।वही किसान ने बताया कि लेखपाल हम लोगो को बहुत परेशान कर रहा था यह लोग दौड दौड़ के हमारे पास आये हमने बात लेखपाल से की और पैसे की ही मांग कर दी,और पैमाईश और राउनी व नाली के नाप के लिए पैसा हमने जाकर दिया पन्द्रह  हज़ार आशाराम यादव लेखपाल खागा तहसील के  बराहटा मजरे चकिया ने लिया, मगर उसके बाद भी पीड़ित को कब्जा नही मिला ।सब से बड़ी बात तो यह है कि सरकार एक तरफ किसानों को हर सुविधा देने का प्रयास कर रही है ।तो दूसरी तरफ  सरकारी नुमाइंदे जनता का काम के बसले अपनी जेब भरने में लगे है ।एक वाइरल वीडियो ने सरकारी निजाम की पोल खोल कर रख दी।

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