प्राथमिक विद्यालय परसोडा के अंदर एक बिल्डिंग कि हालत जर्जर् कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

 प्राथमिक विद्यालय परसोडा के अंदर एक बिल्डिंग कि हालत जर्जर्  कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा



रिपोर्ट - श्रीकांत श्रीवास्तव


बांदा - उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा शिक्षा विभाग के माध्यम से ग्रामीण स्तर का शिक्षा स्तर सुधारने के लिए लगातार अनेकों प्रयास किए जा रहे हैं नए-नए स्कूल कॉलेज का निर्माण करवाया जा रहा है लेकिन कुछ विद्यालयों की हालत बहुत जर्जर है छोटे-छोटे बच्चे पढ़ते हैं हालांकि बच्चों को उनमें बिल्डिंग में पढ़ाया नहीं जाता लेकिन फिर भी बच्चे खेलने कूदने के हिसाब से आते जाते रहते हैं एक विद्यालय परिसर के अंदर इतनी जर्जर स्थिति में कक्षाओं की बिल्डिंग कैसे हो सकती हैं प्रधानाचार्य के द्वारा बताया गया वह 2009 से इसी विद्यालय में पढ़ा रहे और जब से आए तब से इसी कंडीशन में  बिल्डिंग है सवाल यह उठता है कि सरकार के द्वारा इतना बजट शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए खर्च किया जाता है। तो जमीनी स्तर पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा है। क्यों नहीं इन बिल्डिंगों की मरम्मत कराई जाती है। क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है जिला प्रशासन, प्राथमिक विद्यालय में वैसे भी छोटे-छोटे मासूम पढ़ते हैं, जिनकी उम्र ज्यादा से ज्यादा 5 साल से 10 साल के बीच होती है। इन बच्चों को नहीं पता होता है कि हम कहां खेले की या ना खेले हमें उस कमरे में जाना है या नहीं जाना विद्यालय परिसर के अंदर अगर ऐसी बिल्डिंग है तो शिक्षक कब तक बच्चों पर नजर रखेंगे की उस बिल्डिंग में बच्चे ना जाए, इंटरवल होता है इंटरवल में बच्चे खाना खाते हैं खाना खाने के बाद खेलने कूदने के लिए इधर-उधर घूमते हैं कभी भी बच्चे उस बिल्डिंग में भी खेलने जा सकते, ऐसी बिल्डिंग को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है। कभी भी एक बड़ा हादसा हो सकता है। मीडिया कर्मियों के द्वारा जब प्रधानाचार्य से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि हमारे द्वारा कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। लेकिन अभी तक बिल्डिंग की मरम्मत हेतु कोई बजट नहीं आया है। पूरा मामला बांदा जनपद के तिंदवारी ब्लाक अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत परसोडा के प्राथमिक विद्यालय का है। जहां पर इस विद्यालय के प्रधानाध्यापक अभी भी चूल्हे में खाना बनवाते हैं। जब मास्टर साहब से चूल्हे पर खाना बनवाने का कारण पूछा गया तो वही घिसा पिटा बहाना बनाया की गैस खत्म हो गई है। रसोइया से पूछा गया तो उसने बताया की हमेशा चूल्हे में ही खाना बनता है। जब विद्यालय के अंदर गए तो ठीक सामने की कक्षा बिलकुल जर्जर हालत में दिखी।

जब मास्टर साहब से जर्जर कक्षा के बारे में बात की गई तो मास्टर साहब ने बताया की कुल दस हजार रुपए पुताई के लिए आते है।जिससे पुताई कराई जाती हैं। इसके निर्माण के लिए कोई अतिरिक्त बजट नही आता है।जिससे इसकी मरम्मत कराई जा सके। जब मीडिया कर्मियों ने मास्टर साहब से पूछा की अपने विभाग के अधिकारियों को इस जर्जर हालत के बारे में अवगत कराया या नहीं तो मास्टर साहब ने बताया की कई बार अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।

अब देखने वाली बात है की क्या जानबूझ कर विद्यालय की अनदेखी करते हुए किसी अनहोनी होने का इंतजार कर रहा है जिला प्रशासन या समय रहते इसकी मरम्मत कराई जाती हैं

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