संत उमाकांत की प्रार्थना अमन चयन चाहने वाले राष्ट्रपति प्रधानमंत्री बैठक कर शांति स्थापित करें

 संत उमाकांत की प्रार्थना अमन चयन चाहने वाले राष्ट्रपति प्रधानमंत्री बैठक कर शांति स्थापित करें



इंदौर (मध्य प्रदेश)।सन्त उमाकान्त की प्रार्थना- अमन चैन चाहने वाले राष्ट्रपति प्रधानमंत्री मीटिंग करके शांति स्थापित करो।विकसित देश छोटे देशों को गोद लें, हथियार बनाने का पैसा इनके विकास में लगा दो तो आपका नाम कीर्ति हो जाएगी।यह जो लड़ाई करने-कराने में लगे हैं अपने रवैया को नहीं बदले तो इतिहास इनको स्वीकार नहीं करेगा।भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व और मानव जाति का भला चाहने वाले, उसके लिए सद्मार्ग पर चलने के लिए मार्गदर्शन देने वाले इस समय के महान महापुरुष व समाज सुधारक उज्जैन वाले सन्त सतगुरु बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 29 मार्च 2022 को इंदौर आश्रम में दिए व यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि मैंने होली के कार्यक्रम में भी कहा था कि रूस-यूक्रेन की लड़ाई को बंद कर देना चाहिए। जुनून दोनों को सवार है। दोनों कह रहे हम तुमसे कम नहीं। एक अगर छोटा बनकर हाथ जोड़ ले तो दूसरा चुप हो जाएगा।


*अच्छे लोग पहल करेंगे तब लड़ाईयां बंद हो जाएंगी*


इब्लीस जैसे शैतान होते हैं जो जान नहीं ले पाते लेकिन परेशान करते हैं, ऐसे स्वभाव वाले भी लोग हैं जो एक-दूसरे को भड़काते रहते हैं। अच्छे लोग भी होते हैं। देखो अच्छाई और बुराई एक सिक्के के दो पहलू हैं। जहां अच्छाई रहेगी वहां बुराई रहेगी। कभी-कभी जब बुराई बढ़ जाती है तब अच्छाई को लाना पड़ता है। उसका पलड़ा जब भारी हो जाता है तब कुछ दिन तक अच्छाई रहती है। अच्छे लोगों को पहल करना चाहिए तब यह लड़ाईयां बिल्कुल बंद हो जाएंगी।


*विश्व युद्ध छिड़ गया तो अकाल मृत्यु से इतने प्रेत हो जाएंगे कि चैन की रोटी नहीं खा सकते हो*


लड़ाई बंद होने पर यह जो अकाल मृत्यु हो रही है, बेमौत मर रहे हैं, यह नहीं मरेंगे, प्रेत योनि में नहीं जाएंगे, शैतान नहीं बनेंगे। अगर यह लड़ाइयां बंद नहीं हुई और कहीं विश्व युद्ध यदि छिड़ गया तो सैकड़ों हजारों साल के प्रेत तो अभी भी घूम रहे, परेशान कर रहे हैं तो प्रेत ही हो जाएंगे। हिंसा हत्या बंद नहीं हुई तो चैन की रोटी कोई नहीं खा सकता, इतने प्रेत हो जाएंगे। (लोगों को प्रेत) लगे रहते हैं, पता नहीं चलता। इसी (आयी हुई भीड़) में बहुतों को लगे हुए हैं। आप चैलेंज करो मैं बता दूंगा। 10-20-50 को बता दूंगा, इनको लगे हैं, ऐसा बोलता, करता है। सोचो कैसे जी पाओगे।


*जब एक देश से दूसरे देश से संबंध दु:ख तकलीफ में काम आते हो तो क्या मिलकर शांति स्थापित नही कर सकते*


विश्व स्तर पर देशों के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री तक मेरी प्रार्थना पहुंचा दो कि जो लोग बहुत दिनों से बनाई हुई संपत्ति की बर्बादी को रोकना और शांति, अमन-चैन चाहते हैं वो सब लोग मिलकर के एक ऐसा वातावरण बना दें, ऐसी मीटिंग कर ले कि जिससे एकदम से अमन-चैन हो जाए, लड़ाई नाम की चीज ही न रह जाए। जब हर तरह से आप सलाह करते हो, संबंध बनाते हो, चाहे व्यापार का हो, माल भेजते हो, नागरिक पढ़ने, दवा कराने आते-जाते हो, एक-दूसरे देश के विकास में लगे हुए हो तो एक-दूसरे देश के शांति में क्या नहीं लग सकते हो? आप लगो, शांति स्थापित करो।


*विकसित देश है छोटे देशों को गोद ले हथियार बनाने का पैसा इनके विकास में लगा दो तो आपका नाम कीर्ति हो जाएगी*


विकसित देश को छोटे देशों को गोद ले लेना चाहिए। गोद लेना किसको कहते हैं? जैसे दूसरे के बच्चे को कोई ले आता है, अपने यहा पालता-पोस्ता, बड़ा करता, पढ़ाता-लिखाता, नौकरी-काम सिखाता है फिर वह सुखदाई होता है। ऐसे उसको आप विकास के लिए गोद ले लो, उसमें अपनी ताकत लगा दो। आपके हथियार बनाने के पैसा को विकास में लगा दो, आपका नाम, कीर्ति हो जाएगी।


*यह जो लड़ाई करने-कराने में लगे हैं, अपने रवैया को नहीं बदले तो इतिहास इनको स्वीकार नहीं करेगा*


और यह भी बता दें यह जो लड़ाई करने-कराने में लगे हैं जिनका मस्तिक दिल-दिमाग लड़ाकू हो गया है, अगर यह लोग नहीं सम्भले, रवैया नहीं बदला तो तवारीख में इनका नाम कोई लाएगा ही नहीं। इतिहास इनको कभी स्वीकार नहीं करेगा। इतिहास से इनका नाम ही खत्म हो जाएगा। लोग इनको उसी तरह से देखेंगे जैसे लड़ाईयों में लोग मर गए, मरवा दिया, कटवा दिया। नाम तो उसका होता जो रक्षा करता है। मारने वाले से बचाने वाले का हाथ बड़ा होता है, कद बड़ा होता है। इस वक्त पर इस चीज की जरूरत है।


*सन्त उमाकान्त जी के वचन*


देश-विदेश, धर्म, जाति, मजहब इंसानों ने बनाया है। अंडा, मांस, मछली, शराब एवं नशीली चीजों का सेवन इंसान के लिए खतरनाक है। प्रकृति के नियमानुसार न चलने से सजा मिल जाती है। समय के महापुरुष की बात न मानने पर सजा मिल जाती हैं। सन्त सिर्फ समझाते हैं, सजा नहीं देते हैं।