जैन समाज मे धूमधाम से मनाई गई सुगंध दसमी,

 जैन समाज मे धूमधाम से मनाई गई सुगंध दसमी,




बांदा - आज पर्युषण पर्व का छठा दिन उत्तम संयम धर्म है, संयम धर्म अपनी इंद्रियों को संयमित रखने का धर्म है प्राणियों की रक्षा और इन्द्रियों और मन को बस में करना संयम है, दिगम्बर जैन मंदिर में विराजमान आचार्य समतासगर महाराज ने बताया कि सारा संसार इंद्रियों का दास बना हुआ है,बड़े बड़े बलवान योद्धा और विद्द्वान भी इंद्रियों के गुलाम बने हुये है, आचार्य श्री ने बताया कि हाथी कितना बलवान प्राणी है किंतु कामातुर होकर स्पर्शन इंद्रियों को तृप्त करने के लिए मनुष्य के जाल में फस जाता है। उन्होंने कहा कि हाथी पकड़ने वाले मनुष्य हाथी को जाल में फसाने के लिए एक बड़ा गड्ढा खोदते है ,उसको बहुत पतली लकड़ियों से पाटकर उस पर हरी घास फैला देते है और कागज़ की एक सुंदर हथनी बनाकर खड़ी कर देते है । हाथी उस हथनी को सच्ची हथनी समझकर कामातुर होकर आगे बढ़ता है और गड्ढे में गिर जाता है। वही तारण तरण दिगम्बर जैन चैत्यालय में बाहर से पधारे विद्वान ग्यायक शास्त्री जी ने बताया कि स्पर्श,रसना, घ्राण ,चक्षु और कर्ण पर नियंत्रण करना संयम धर्म है।

वही आज पर्युषण पर्व के छठे दिन जैन समाज ने सुगंध दसमी के पर्ब को धूम धाम से मनाया इस दिन जैन धर्मावलंबी  जैन मंदिरों में जाकर पूजा, स्वध्याय, जिनवाणी श्रवण ,ओर अपनी आत्मा में शुचिता लाने के लिए आत्म मंथन करते है। वही महिलाएं इस पर्व में सज,सवरकर सुहाग से संबंधित चीजे जैसे सिन्दूर, बिंदी आदि बाटकर अपने पति के दीर्घायु होने की कामना करती है।

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