सत्येंद्र हत्याकांड के आरोपी पुलिसकर्मी फरार, परिवार को न्याय का इंतजार

 सत्येंद्र हत्याकांड के आरोपी पुलिसकर्मी फरार, परिवार को न्याय का इंतजार



थाने की जीडी लेकर भाग गया आरोपी इंस्पेक्टर सुनील


रिपोस्टिंग पर था आरोपी इंस्पेक्टर व कारखास सिपाही


फतेहपुर। राधानगर थाने में हुई सत्येंद्र की निर्मम हत्या के आरोपी पुलिसकर्मी तीन दिन के बाद भी पुलिस की पकड़ से कोसो दूर हैं। जांच भी धीमी गति से आगे बढ़ रही है। जबकि पुलिस सूत्र बताते हैं कि घटना में नामजद इंस्पेक्टर सुनील सिंह को दूसरे नामजद एसआई ने इतना न मारने के लिए टोका था। लेकिन इंस्पेक्टर व उनके कारखास सिपाही की आंखों के सामने मोटी रकम का पर्दा पड़ा था वह बुरी तरह सत्येंद्र को पीट रहे थे। पीड़ित के भाई इंजीनियर अरविंद ने कहा कि उन्हें शक है कि उच्चाधिकारी आरोपी पुलिसकर्मियों की मदद कर रहे हैं। अन्यथा भाई के चेहरे पर इतने चोट के निशान थे कि घटना स्पष्ट नजर आ रही थी। उन्होंने कहा अगर भाई के हत्यारे पुलिसकर्मियों को पुलिस ने नहीं पकड़ा तो वह शासन व मुख्यमंत्री से गुहार लगाएंगे।


15 दिन के अंदर दर्ज कराएं बयान : उपजिला मजिस्ट्रेट


घटना की मजिस्ट्रेटियल जांच भी चल रही है जिसको एसडीएम नंद प्रकाश मौर्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राधानगर थाने में पूछताछ के लिए लाए गए सत्येंद्र कुमार पुत्र जगतपाल निवासी रेय मजरे कीर्तिखेड़ा की मृत्यु के मामले की जांच उनके द्वारा की जा रही है। पुलिस अभिरक्षा में हुई मृत्यु के सम्बंध में अगर कोई भी जनसामान्य कुछ भी जानकारी रखता है तो किसी भी कार्यदिवस में 15 दिन के अंदर वह अपने बयान दर्ज करवा सकता है और अगर कोई साक्ष्य हो तो उसे भी प्रस्तुत कर सकता है।


जीडी लेकर भाग गया आरोपी इंस्पेक्टर


पुलिस सूत्रों की माने तो सत्येंद्र हत्याकांड का मुख्य आरोपी इंस्पेक्टर सुनील राधानगर थाने की जीडी लेकर भाग गया है। बताते हैं कि जब भी पुलिस किसी को पकड़ने या छापा मारने जाती है तो जीडी में समय और मौके पर जाने वाली टीम की जानकारी उसमे अंकित की जाती है। जबसे आरोपी जीडी लेकर भागा है कई सिपाही भी चिंतित हैं कि कहीं वह इस घेरे में न आ जाएं। जबकि ऐसी चर्चा है कि इसकी जानकारी उच्चाधिकारियो को है जिन्होंने नारागजी ब्यक्त की है। सम्भव है इस हरकत पर उच्चाधिकारी इंस्पेक्टर के खिलाफ अन्य मुकदमा भी दर्ज करवा सकते हैं।


 रिपोस्टिंग पर था इंस्पेक्टर व उनका कारखास दीपक


राधानगर को शासन ने हाल ही में थाना घोषित किया है यह अब तक चौकी रही है। जहां सुनील सिंह चौकी इंचार्ज बने। अपराध नियंत्रण में फेल होने पर उन्हें हटाया गया बाद में महज दो माह के बाद पुनः थाना बनते ही पहले थानाध्यक्ष के रूप में सुनील सिंह को तैनाती राधानगर दे दी गई। यही हाल उनके कारखास दीपक का भी है। वह उनका सबसे करीबी सिपाही रहा है। जो उस क्षेत्र के चप्पे चप्पे से वाकिफ है और लगभग चार वर्ष से क्षेत्र में आपराधिक तत्वों का सहयोगी है। हालांकि घटना में उसका नाम लिखापढ़ी में नहीं आया। मगर पुलिस सूत्र ही बताते हैं कि घटना के वक्त वह भी मारपीट में शामिल था। बीच मे तीन साल से अधिक होने के कारण उसका ट्रांसफर दूसरे थाना क्षेत्र में किया गया था मगर सेटिंग करके उसने पुनः ट्रांसफर नए थाने राधानगर में करवा लिया। बताते हैं अगर ढंग से जांच हुई तो इस सिपाही व इंस्पेक्टर सुनील सिंह के सताए हुए कई लोग सामने आ सकते हैं।

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