टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग पॉलिसी-2022 वस्त्र और परिधान उद्योग मैं भारत छटा सबसे बड़ा निर्यातक: राकेश सचान

 टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग पॉलिसी-2022 वस्त्र और परिधान उद्योग मैं भारत छटा सबसे बड़ा निर्यातक: राकेश सचान



फतेहपुर।मंत्री, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं वस्त्रोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा तथा वस्त्रोद्योग विभाग उत्तर प्रदेश राकेश सचान पत्रकारों से बातचीत में कहा कि टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग पॉलिसी-2022 वस्त्र और परिधान उद्योग में तेजी से वृद्धि के साथ भारत दुनिया में इनका छठा सबसे बड़ा निर्यातक हैं।

हमारे संकल्प पत्र में प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाकर 10 हजार करोड़ के निजी निवेश को आकर्षित कर 5 लाख रोजगार सृजन इस नीति का मुख्य लक्ष्य है।

प्रदेश देश का सबसे बड़ा घरेलू बाजार है जहाँ प्रशिक्षित श्रमिक / बुनकर है। प्रदेश में वस्त्र उद्योग के विकास हेतु संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता है। निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने हेतु नीति में निवेश प्रक्रिया को ऑनलाइन करना, निवेशक हेल्प डेस्क एवं समस्या निवारण प्रणाली की व्यवस्था है। प्रदेश के निवेश को आकर्षित करने, रोजगार को बढ़ाने, युवाओं को इस व्यवसाय में प्रोत्साहित करने, बुनकरों के बच्चों को स्वरोजगार में प्राथमिकता नीति का उद्देश्य है।उoप्रo वस्त्र एवं गारमेंटिंग पालिसी-2022 में वस्त्र उद्यमियों को आकर्षित करने हेतु प्रदेश में स्थापित होने वाली वस्त्र एवं गारमेंटिंग इकाईयों को प्रमुख रूप से निम्नवत् सुविधाएं प्रदान की जाएँगी।सरकारी संस्थाओं द्वारा विकसित औद्योगिक क्षेत्रों में वस्त्र इकाइयों हेतु भूमि कय पर लागत का 25 % (गौतम बुद्ध नगर में 15%) अनुदान दिया जायेगा। उक्तानुसार भूमि खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी में 100 % तथा गौतम बुद्ध नगर में 75% की छूट दी जायेगी । प्लान्ट एवं मशीनरी खरीद पर 25% तथा पूर्वांचल व बुन्देलखण्ड में स्थापित होने वाली इकाइयों को 10% अतिरिक्त पूंजी सब्सिडी प्रदान की जाएगी।

इकाइयों को स्वयं के उपयोग हेतु सड़क, जलापूर्ति, जल निकासी तथा विद्युत में परियोजना लागत का 50% अधिकतम 03 करोड़ तक अनुदान ईटीपी एवं डीजी सेटों की स्थापना हेतु लागत का 50% अधिकतम 05 करोड़ प्रति इकाई, आंतरिक प्रशिक्षण हेतु लागत का 25%, अधिकतम रूपये 2.5 करोड़ तक, स्टाफ क्वार्टर, वर्कर हॉस्टल / डॉरमेट्री के लिए परियोजना लागत का 25%, अधिकतम रूपये 5 करोड़ तक अनुदान ।

प्लांट एवं मशीनरी हेतु लिये गये ऋण के भुगतान पर वार्षिक ब्याज के 60% ब्याज की प्रतिपूर्ति अधिकतम 07 वर्षों तक दिया जायेगा। यह सब्सिडी 1.5 करोड़ (गौतम बुद्ध नगर में 75 लाख) तक होगी।

नई इकाईयों को इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 100 प्रतिशत छूट, 10 वर्षों तक तथा अधिक खपत करने वाली इकाईयों को खुली पहुँच की अनुमति होगी। मेगा एवं सुपर मेगा गारमेन्टिंग इकाईयों को रू0 3200 /- प्रति श्रमिक प्रति माह रोजगार सृजन अनुदान 5 वर्षों तक दिया जायेगा ।

निर्यात बढ़ाने हेतु नई इकाइयों को फैक्ट्री से पोर्ट तक ले जाने हेतु माल भाड़े में 5 वर्षों तक छूट दिया जायेगा। प्रथम 02 वर्षों में 75%, अगले 02 वर्षों हेतु 50% तथा अन्तिम वर्ष में 25% भाड़ा का अनुदान दिया जायेगा।

निजी क्षेत्र में न्यूनतम 25 एकड़ भूमि पर टेक्सटाइल पार्क विकसित करने हेतु लागत का (भूमि लागत छोड़कर) 50% अधिकतम 50 करोड़ तक धनराशि देय होगी। रेशम उद्योग के प्रोत्साहन हेतु 01 करोड़ लागत वाली रीलिंग इकाई को 18% तथा 01 करोड़ या अधिक पूंजी निवेश करने वाली रीलिंग इकाई को 20% कैपिटल सब्सिडी दी जायेगी लखनऊ / हरदोई जनपद में चिन्हित 1000 एकड़ भूमि पर पी०एम० मित्र योजनान्तर्गत भारत सरकार द्वारा मेगा एकीकृत टेक्सटाइल पार्क विकसित करने हेतु 500 करोड़ की धनराशि दी जायेगी।

इस पार्क में 50 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करने वाली इकाईयों को विद्युत टैरिफ में रू0 2/- प्रति यूनिट की छूट 05 वर्ष तक दी जायेगी, जो अधिकतम प्रति इकाई / प्रति वर्ष रू0 60 लाख होगी।

उ0प्र0 के युवावर्ग को इस क्षेत्र में स्वरोजगार हेतु आकर्षित कर उत्पादन डिजाइन विपणन या निर्यात से सम्बन्धित नया रोजगार शुरू करने हेतु प्रोत्साहित किया जायेगा तथा बुनकर के बच्चों को अतिरिक्त वरीयता रहेगी।उत्पादन क्षेत्र से सम्बन्धित नया रोजगार प्रारम्भ करने हेतु प्रदेश वासियों को वित्तीय सुविधायें।नया रोजगार प्रारम्भ करने हेतु शासकीय प्राधिकरणों से भूमि क्रय करने पर वरीयता दी जायेगी।इण्डियन इन्स्टीट्यूट आफ हैण्डलूम टेक्नोलाजी से तीन वर्षीय डिप्लोमाधारी जो छात्र एक शेड में 5 से 20 हथकरघा अथवा 5 से 10 पावरलूम स्थापित कर स्वयं बुनाई का नया रोजगार शुरू करते हैं, उन्हें प्रोजेक्ट कास्ट का 75% अनुदान देय होगा, जो हथकरघा हेतु अधिकतम 20 लाख तथा पावरलूम हेतु अधिकतम 60 लाख प्रति व्यक्ति / समूह तक सीमित होगा।टेक्सटाइल, टेक्सटाइल डिजाइन या फैशन डिजाइन के क्षेत्र में स्नातक उत्तीर्ण को गारमेन्टिंग एवं अपैरेल या होम फर्नीशिंग क्षेत्र में रोजगार प्रारम्भ करने हेतु निम्नानुसार प्रोत्साहित किया जायेगा।प्राधिकरणों / सरकारी संस्थाओं द्वारा आवंटित फ्लैटेड फैक्ट्री के किराये पर 5 वर्ष तक 50% अनुदान दिया जायेगा।नये रोजगार प्रारम्भ हेतु स्थापित प्लांट, मशीनरी तथा अवस्थापना लागत का 75% अधिकतम रूपये 25 लाख अनुदान प्रति उद्यमी देय होगा। डिजाइन क्षेत्र से सम्बन्धित नया रोजगार प्रारम्भ करने हेतु वित्तीय सुविधायें डिजाइनिंग में स्नातक उत्तीर्ण यदि कोई डिजाइन स्टूडियो स्थापित करना चाहते है, तो उन्हें प्रोजेक्ट कास्ट का 75% अधिकतम रू0 30 लाख प्रति उद्यमी अनुदान देय होगा। विपणन क्षेत्र से सम्बन्धित नया रोजगार प्रारम्भ करने हेतु वित्तीय सुविधायें प्रदेशवासी संगठित युवाओं को वस्त्रों की विकी को बढाने हेतु विपणन व्यवस्था के साथ ऑनलाइन बिकी हेतु मार्केटिंग कम्पनी बनाकर नया रोजगार प्रारम्भ करने प्रोत्साहन स्वरूप कम्पनी की स्थापना सुविधाओं पर आई लागत का 75 % अनुदान अधिकतम रूपये 50 लाख प्रति कम्पनी देय होगा। इसमें बुनकरों के बच्चों को वरीयता दी जायेगी। अपना ब्राण्ड बनाकर प्रदेश प्रदेश के बाहर उसका चेन आउटलेट खोलने पर प्रत्येक आउटलेट से तीन वर्षों तक बिकी होने पर निम्न वित्तीय सहायता देय होगी 

50 आऊटलेट पर 2 करोड़ जबकि बिकी प्रति वर्ष न्यूनतम 4 करोड़ हो ।

100 आऊटलेट पर 4 करोड़ जबकि विकी प्रति वर्ष न्यूनतम 8 करोड़ हो । 200 आऊटलेट पर 8 करोड़ जबकि बिकी प्रति वर्ष न्यूनतम 16करोड़ हो ।

500 आऊटलेट पर 10 करोड़ जबकि बिकी प्रति वर्ष न्यूनतम 20 करोड़ हो शर्त है कि कुल आऊटलेट का 80 प्रतिशत प्रदेश के बाहर स्थापित किये गये हो। यदि देश के बाहर 25 आऊटलेट खोलता है और न्यूनतम 2 करोड़ प्रतिवर्ष की बिकी करता है तो उसे वन टाइम 2.00 करोड़ अतिरिक्त अनुदान देय होगा साथ ही निर्यात हेतु वित्तीय सुविधायें निर्यात को बढ़ाने हेतु यदि नया एक्सपोर्ट हाउस प्रदेश में प्रारम्भ करने पर पंजीकरण आदि में व्यय शुल्क का 75% प्रतिपूर्ति तथा आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं में लागत का 75% अनुदान अधिकतम 20 लाख प्रति एक्सपोर्ट हाउस / कम्पनी देय होगा । उन्होंने कहा कि बायर सेलर मीट / क्रेता-विक्रेता संगम : प्रदेश में उत्पादित वस्त्रों के निर्यात को बढ़ाने हेतु वर्ष में प्रदेश के पश्चिमी एवं पूर्वी क्षेत्र में एक-एक बायर सेलर मीट का आयोजन कराया जायेगा। जिसकी आवश्यक व्यवस्था हेतु अधिकतम रू० 20 लाख प्रति वायर सेलर मीट व्यय किया जायेगा। निर्यात से सम्बन्धित संस्था स्वयं कोई बायर सेलर मीट आयोजित करती है, तो कुल लागत का 50% अधिकतम रू0 10 लाख प्रति मीट हेतु अनुदान दिया जायेगा। 6- फैशन शो का आयोजन - निर्यात / विपणन को बढ़ाने हेतु विभाग / संस्था द्वारा प्रदेश के दो बड़े महानगरों में फैशन शो आयोजित करने हेतु अधिकतम रू० 20 लाख प्रति फैशन शो व्यय किया जायेगा।

निर्यात मेले या एक्सपो का आयोजन प्रदेश या देश के प्रमुख व्यापारिक केन्द्रो में वर्ष में एक बार 14 दिवसीय उ0प्र0 हैण्डलूम, सिल्क एवं खादी उत्पादों की बिक्री हेतु एक्सपो का आयोजन कराया जायेगा, जिस पर रू0 70 लाख व्यय किया जायेगा।

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