फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ

 फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ



बांदा - जिला पुरुष अस्पताल में जिलाधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल ने फाइलेरिया से बचाव की दवा खाकर अभियान का शुभारंभ किया इसके साथ ही उन्होंने फाइलेरिया उन्मूलन के लिये जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

 रैली में शामिल नर्सिंग छात्र छात्राओं ने जन-जन का है एक ही नारा, फाइलेरिया मुक्त हो देश हमारा, स्वस्थ होगा शहर व गांव, जब जड़ से मिटेगा हाथी पांव... जैसे नारे लगाए। साथ ही लोगों को फाइलेरिया से बचाव हेतु 10 से 27 फरवरी तक आयोजित होने वाले फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की जानकारी दी। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी और लोगों को फाइलेरिया रोग से बचाव के लिए दवा खाने और अपने आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित किया। 


इसके साथ ही जिलाधिकारी इंदिरानगर क्षेत्र स्थित संत तुलसी पब्लिक स्कूल पहुंची वहां उन्होंने उपस्थित छात्राओं को अपने हाथों से फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन करवाया। 

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मी जब भी घर पर दवा खिलाने आयें तो दवा का सेवन जरूर करें।

 दवा पूरी तरह सुरक्षित है। जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की है कि वह खुद दवा का सेवन करें और आस-पास के लोगों को दवा सेवन के लिए प्रेरित करें। दवा का सेवन खाली पेट नहीं करना है ।

 पांच साल में तीन बार यानी साल में एक बार इस दवा का सेवन कर लेने से फाइलेरिया (हाथीपांव व हाइड्रोसील) से बचाव होगा । 

उन्होंने फाइलेरिया उन्मूलन की शपथ दिलाई और अभियान के समर्थन में हस्ताक्षर भी किया।


अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अजय कुमार ने बताया कि जिले की करीब 20.86 लाख की आबादी को दवा का सेवन कराया जाएगा। कहा कि जिला के सभी प्रखंडों में व्यापक स्तर पर फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम किया जाना है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ ले सकें। दवा खिलाने के लिए सभी आंगनबाड़ी केंद्र, सभी स्वास्थ्य उप केंद्र, सभी स्वास्थ्य केंद्र, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व सभी वार्ड कार्यालय को बूथ बनाया गया है। जहां जाकर दवा का सेवन कराया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि फाईलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के सफल होने से सभी बेहतर स्वास्थ्य की ओर कदम बढ़ाएंगे। 

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम डा. मुकेश पहाड़ी ने बताया अभियान के संचालन के लिए 1814 टीम बनाई गई हैं जिन पर नजर रखने के लिए 300 पर्यवेक्षकों को लगाया गया है । फाइलेरिया से बचाव की दवा शरीर में इसके परजीवियों को मारती है जिसके प्रतिक्रिया स्वरूप कभी कभी सिर दर्द, शरीर दर्द, बुखार, उल्टी और बदन पर चकत्ते जैसे लक्षण सामने आते हैं । यह लक्षण स्वतः ठीक हो जाते हैं और जिनमें यह लक्षण आ रहे हैं उन्हें खुश होना चाहिए कि वह फाइलेरिया से मुक्त हो रहे हैं। जरूरी समझने पर आशा कार्यकर्ता की मदद से रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र की सेवाएं ले सकते हैं । उन्होंने बताया कि जिले में हाथीपांव के 732 मरीज चिन्हित हैं । फाइलेरिया ग्रसित इन जैसे और भी मरीज न आएं इसी उद्देश्य से बड़ी आबादी को दवा का सेवन करवाना होगा, जिसमें सामुदायिक सहयोग अपेक्षित है ।

जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) पूजा अहिरवार ने कहा कि अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता व स्वास्थ्यकर्मी घर – घर जाएंगे और अपने सामने ही दो वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कराएंगे। गर्भवती और अति गंभीर बीमार को दवा का सेवन नहीं करना है । एक से दो वर्ष तक के बच्चों को सिर्फ पेट के कीड़े निकालने की दवा खिलाई जाएगी । 

स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी किया दवा का सेवन

इस अवसर पर उपस्थित जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सहित सभी स्वास्थ्य अधिकारियों, स्वयंसेवी संस्था के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में आम जनता ने दवा का सेवन किया। डीएमओ ने बताया कि अभियान के पहले दिन दवा सेवन के दुष्प्रभाव की कोई घटना सामने नहीं आई है। इस अवसर पर मलेरिया निरीक्षक, यूनिसेफ, स्वयंसेवी संस्था सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च(सीफॉर),पीसीआई और पाथ के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में अस्पताल के कर्मचारी मौजूद रहे।

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